अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के नेत्र विज्ञान अधिकारी के हवाले नेत्र रोग ओपीडी चल रही है। दो माह से नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं होने से ऑपरेशन के साथ दिव्यांगों के मेडिकल प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। मरीजों को उपचार के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है और उन्हें भारी भरकम राशि अदा करनी पड़ रही है।
उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे 80 से 100 मरीजों का प्राथमिक उपचार अस्पताल के नेत्र विज्ञान अधिकारी की ओर से किया जा रहा है। कई बार तो यहां भी मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। दो महीनों से नेत्र विशेषज्ञों के अभाव से सबसे अधिक परेशान ऑपरेशन करने वाले मरीज व दिव्यांग है। हेत राम, अनुज, संजय सिंह, प्रेम लाल, सुमित, चमन सिंह, राजन, दिले राम, अमर सिंह, सुनील, हरीश, हरि सिंह, अनूप राम तथा हिरेद राम ने कहा कि अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं होने से आंखों के ऑपरेशन नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों को निजी अस्पताल में महंगा इलाज करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुल्लू अस्पताल मेें न केवल जिला कुल्लू के मरीज परेशान हैं, बल्कि जनजातीय क्षेत्र लाहौल, पांगी व मंडी जिला के द्रंग व बालीचौकी से आने वाले लाग मुश्किल में हैं। देवभूमि दिव्यांग संघ कुल्लू के नग्गर खंड के प्रधान अमर सिंह प्रेमी ने कहा कि अस्पताल में आंख के मरीजों का प्राथमिक उपचार हो रहा है। लेकिन दिव्यांगों के प्रमाण पत्र दो महीनों से लटके हैं। उन्होंने वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर से कुल्लू अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ को भेजने की मांग की है।