सूखे से प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की कगार पर
बर्फबारी के मौसम में भी बने गर्मियों जैसे हालात
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में गर्मियों के दौरान जल संकट गहरा सकता है। सूखे के कारण प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। बावड़ी आदि में पानी भी नाममात्र का ही रह गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को पेयजल के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दिसंबर और जनवरी का आधा माह बीत जाने के बाद बर्फबारी और बारिश नहीं हो रही है। बर्फबारी के मौसम में भी गर्मियों जैसे हालात बने हुए हैं। जिसको लेकर लोगों को चिंता सताने लगी है। घाटीवासी रमेश कुमार, चांद किशोर, मदन लाल, देवराज ठाकुर, टीआर आजाद, केशव राम और दौलत राम ने कहा कि जिला कुल्लू में पड़ रहे भारी सूखे से पेयजल स्रोत सूखने की कगार पर आ गए हैं। प्राकृतिक जल स्रोत में पानी कम होने से लोगों को पेयजल को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बारिश व बर्फबारी न होने से पेयजल स्रोतों को संजीवनी मिल जाती थी लेकिन डेढ़ माह से सूखा होने से घाटी के किसान व बागवानों की भी मुश्किलें बढ़ गई है। अगर जनवरी माह के अंत तक जिला में बारिश व बर्फबारी नहीं होती है तो आने वाले दिनों में जल संकट गहराया सकता है। हालांकि लोग बारिश के देवी देवताओं की शरण में जा रहे हैं लेकिन अभी तक जिलावासियों को राहत नहीं मिल सकी है। देवता बिजली महादेव के कारदार अमरनाथ नेगी ने कहा कि लोगों ने बारिश के लिए देवता से गुहार लगाई है।