कुल्लू। स्क्रब टायफस से आईजीएमसी शिमला में कुल्लू जिले से संबंध रखने वाले दो लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग चौकस हो गया है। सीएमओ कुल्लू डॉ. सुशील चंद्र ने मामले पेश आनेे के बाद संबंधित बीएमओ से रिपोर्ट तलब की है। दोनों मरीजों की मौत के पीछे सही कारणों का पता लगाया जा रहा है। स्क्रब टायफस से हुई दो लोगों की मौत से कुल्लू जिले में हड़कंप मचा हुआ है।
आईजीएमसी शिमला में बंजार उपमंडल के प्रताप और आनी उपमंडल की बंगलू देवी की मौत स्क्रब टायफस से बुधवार शाम को हुई। प्राथमिक जानकारी में सामने आया है कि आनी क्षेत्र की बंगलू देवी ने आनी सिविल अस्पताल में गत चार सितंबर को अपना चेकअप करवाया था। डॉक्टर ने मरीज को स्क्रब टायफस की दवा लिखी और अस्पताल में दाखिल करने की सलाह दी थी, लेकिन छह सितंबर को आईजीएमसी शिमला में मौत की सूचना मिली। वहीं, बंजार क्षेत्र के प्रताप सिंह का भी ऑडिट करवाया जा रहा है। सीएमओ ने दोनों ही मामलों को गंभीरता से लेते हुए ऑडिट रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर तलब की है। इधर, सीएमओ कुल्लू डॉ. सुशील चंद्र ने बताया कि आईजीएमसी में कुल्लू जिला के दो मरीजों की मौत को लेकर संबंधित बीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई है। बीएमओ और डीपीओ के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के बारे में भी कहा गया है। स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर स्क्रब टायफस से निपटने के लिए डॉक्सीस्लाइन दवा है, जो रोगी को निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है।
अब तक 19 केस पॉजीटिव
कुल्लू जिला में स्क्रब टायफस को लेकर पहली जनवरी 2017 से लेकर अब तक करीब 78 मरीजों का सैंपल लैब में टेस्ट किए गए हैं। इनमें 19 केस पॉजीटिव पाए गए हैं। जबकि, वर्ष 2016 में कुल 269 सैंपल जांचे गए। इनमें से 34 केस पॉजीटिव थे।
क्या है स्क्रब टायफस
स्क्रब टायफस जानलेवा बीमारी है। सही समय पर उपचार न होने पर रोगी की जान तक चली जाती है। हालांकि, लक्षण दिखते ही उपचार करने पर बीमारी काबू में आ जाती है। यह रोग एक जीवाणु विशेष (रिकेटशिया) से संक्रमित पिस्सु के काटने से फैलता है जो खेतों, झाड़ियों और घास में रहने वाले चूहों में पनपता है। यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस बुखार पैदा करता है। जुलाई से लेकर अक्तूबर तक इस बीमारी के फैलने की अधिक आशंका रहती है।
बीमारी के लक्षण
-तेज बुखार आना जो 104 से 105 डिग्री तक हो सकता है।
-रोगी के जोड़ो में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना।
-रोगी के शरीर में ऐंठन, अकड़न या फिर रोगी का शरीर टूटने लगता है।
-अधिक संक्रमण में रोगी की गर्दन, बाजुओं के नीचे और कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना।
बॉक्स
ऐसे करें बचाव
-शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें।
-घर के चारों ओर उगी घास की समय-समय पर सफाई करें।
-खरपतवार को उगने न दें।
-आवास के अंदर और आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।
-खेतों में काम करते समय टांग, पांव और बाजू ढककर रखें।
-लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।