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अब कुल्लू के बगीचों में तैयार होगा इटली, अमेरिका व होलैंड का सेब

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कुल्लू। बागवानी के क्षेत्र में विख्यात कुल्लू घाटी के बगीचों में अब इटली, अमेरिका और हॉलैंड के सेब के पौधे तैयार किए जाएंगे। विदेशी सेब के पेड़ मात्र तीन साल में फल देना आरंभ कर देते हैं। प्रदेश सरकार की ओर से विश्व बैंक के सहयोग से बागवानी विकास परियोजना शुरू की है।
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बागवानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने की दिशा में आरंभ हुई यह स्कीम किसी एक बागवान को व्यक्तिगत तौर पर विकसित नहीं करेगी बल्कि यह स्कीम बागवानों के एक समूह के तौर पर काम करेगी। उद्यान विभाग की देखरेख से चलने वाली इस स्कीम में बागवानों को स्वयं सेब की पौध को खरीदना होगा। अभी तक बागवानी कुल्लू ने इस स्कीम के तहत 17.156 हेक्टेयर एरिया को चिन्हित किया है और विभाग ने प्रथम चरण में जिला के 20 पंचायतों में बागवानों के समूह (कलस्टर) बनाए गए हैं।
इधर, उद्यान विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ राजकुमार शर्मा ने इस स्कीम के आरंभ होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस योजना की तकनीकी जानकारियों के साथ विभाग स्कीम के तहत चिन्हित क्षेत्र में लगाए जाने वाले सेब बगीचों में स्टोर टैंक, बाड़ बंदी तथा टपक सिंचाई आदि की आधुनिक स्तर की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
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90 फीसदी से अधिक परिवार बागवानी से जुड़े
कुल्लू घाटी की 90 फीसदी से अधिक परिवार बागवानी से जुड़े हैं और करीब 26 हजार हेक्टेयर में सेब के बगीचे लगाए गए हैं। बावजूद उन्हें और आर्थिक तौर पर विकसित करने के लिए अमेरिका, हॉलैंड और इटली के वर्तमान सेब के पौधों को लगाया जाएगा। इसमें रेड विलोक्स, जेरो माइन, रेड फियूजी, सन फियूजी, कारलेट स्पर टू तथा ओरगन स्पर आदि वैरायटी शामिल है।

20 स्थानों को किया जा रहा है कवर
बागवानी विकास योजना के तहत कम से कम 10 से 12 तथा अधिकतम 20 किसान-बागवानों की खेती एक साथ होने पर शामिल किया जाएगा। विभाग की ओर से पहले चरण में तलोगी, काईस, नियूली, भल्याणी, जिंदौड़, बल्ह, रायसन, बड़ाग्रां, हलाण-दो, सोयल, लरांकेलो, फोजल, कटराईं, कलवारी, चनौन, सरची, चेहणी तथा बनोगी सहित 20 स्थानों को कवर किया जा रहा है।
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