कुल्लू। घाटी में लगातार बारिश का दौर रहने से जिला प्रशासन ने दो हफ्ते पहले ही ब्यास की धारा पर रिवर राफ्टिंग बंद कर दी है। हालांकि बरसात के मौसम में राफ्टिंग अधिकारिक तौर पर 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बंद रहती है। परंतु इस बार प्रशासन ने दो हफ्ते पहले ही इस पर रोक लगा दी है।
ब्यास नदी के साथ-साथ इसकी सहायक नदियों का जलस्तर भी उफान है, ऐसे में रिवर राफ्टिंग करने वाले सैलानियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। ऐसे में अब कुल्लू-मनाली का सैर सपाटे करने वाले सैलानी बबेली, बाशिंग, पिरड़ी, झिड़ी तथा रायसन आदि रिवर राफ्टिंग प्वाइंटों में सन्नाटा पसरा रहेगा।
उपायुक्त कुल्लू युनूस ने कहा कि सैलानियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर 28 जून से रिवर राफ्टिंग को कंद कर दिया है। उफनती ब्यास में पर्यटकों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। वहीं जिला पर्यटन अधिकारी रत्तन गौतम ने कहा कि समय से पहले मानसून की दस्तक देने से ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसे में जिला प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी है। 15 जुलाई से अधिकारियों तौर से 15 सितंबर तक रविर राफ्टिंग बंद रहेगी।
पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत हैं 160 राफ्टें
जिला कुल्लू में बबेली, बाशिंग, पिरड़ी, रायसन तथा झीड़ी आदि रिवर राफ्टिंग प्वाइंटों पर करीब 160 राफ्टों का संचालन होता है। इस संबंध में जिला पर्यटन अधिकारी रत्तन गौतम ने कहा कि रिवर राफ्टिंग के नियमों को पूरा करने वाले करीब 60 संचालकों को लाइसेंस दिया गया है। विभाग तथा तकनीकी कमेटी की ओर से समय-समय चेकिंग और राफ्टों का निरीक्षण किया जाता है।