अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। पिरड़ी संयंत्र विवाद को लेकर वन अधिकार समिति का धरना रविवार को भी जारी रहा। जिला मुख्यालय के कुछ जगहों पर लगे कूड़े-कचरे के ढेरों को 16 दिनों के बाद हटाया गया, जबकि अन्य जगहों में पसरी गंदगी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। उधर, नगर परिषद कुल्लू पिरड़ी कूड़ा संयंत्र विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। ऐसे में अब नगर परिषद कुल्लू के साथ प्रशासन, बल्ह पंचायत व वन अधिकार समिति की नजरें कोर्ट पर टिकी हैं।
ब्यास की बाढ़ की चपेट आई पिरड़ी संयंत्र की सुरक्षा दीवार की मरम्मत का कार्य नगर परिषद ने शुरू कर दिया है। जिला मुख्यालय ढालपुर के महत्वपूर्ण चौक व चौराहों में लगे गंदगी के ढेरों को नगर परिषद ने साफ कर दिया है। इन चौक चौराहे पर लोगों की अधिक आवाजाही को देखते हुए नगर परिषद हरकत में आ गया है। कूड़ा उठने से शहरवासियों ने राहत की सांस ली है। लेकिन नगर परिषद ने इस कूड़े-कचरे को कहां डंप किया है। अब इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिरड़ी डंपिंग साइट पर वन अधिकार समिति का धरना जारी है। हालांकि शहर के कुछ महत्वपूर्ण इलाकों में साफ-सफाई पटरी पर लौटी है। लेकिन भुंतर से लेकर रामशिला तक टनों के हिसाब कूड़े के ढेर लगे हैं। वहीं धरना स्थल पिरडी में प्रशासन की ओर से लगाई धारा 144 लागू है। लोगों का कहना है कि पिरड़ी में जब लोगों की भीड़ ही नहीं है तो यहां धारा 144 लगाने का क्या औचित्य है। राजेंद्र, अनिल कांत तथा वन अधिकार समिति अध्यक्ष जोगिंद्र ठाकुर ने कहा कि अगर नगर पंचायत कुल्लू शहर में कूड़े को उठा रही है तो वह इसकी डंपिंग कहां कर रही है। पिछले सप्ताह ब्यास में आई बाढ़ की भेंट की चढ़ी पिरडी डंपिंग साइट की सुरक्षा दीवार के मरम्मत का कार्य नगर परिषद ने गुपचुप तरीके से शुरू कर दिया है। नगर परिषद कुल्लू के उपाध्यक्ष गोपाल कृष्ण महंत ने कहा कि नगर परिषद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई है और नगर परिषद ने समय मांगा है।