तटीकरण प्रोजेक्ट को मिली हरी झंडी, अब बनेगी डीपीआर, तीन पीपीआर को दी स्वीकृति
जुलाई और अगस्त 2024 में कुर्पण खड्ड और समेज में आई बाढ़ से मची थी तबाही
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले की कुर्पण खड्ड और समेज के पास हुई तबाही के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए प्रशासन ने तटीकरण का प्रोजेक्ट बनाया है। इसे प्रदेश सरकार की पीएसी कमेटी ने स्वीकृत कर दिया है।
कुर्पण नदी और समेज के पास नाले के तटीकरण को लेकर जिला प्रशासन ने जल शक्ति विभाग के माध्यम से प्राइमरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (पीपीआर) बनाकर भेजी थी। इसे पीएसी (प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी) ने स्वीकृति दे दी है। ऐसे में अब कुर्पण नदी के साथ साथ समेज नाले के जख्मों पर मरहम लगने की उम्मीद जग गई है। कुल 26 करोड़ से तटीकरण का काम होगा।
इस प्रोजेक्ट की पीपीआर स्वीकृत होने के बाद डीपीआर बनाने की अनुमति मिल गई है। लिहाजा, अब बजट का प्रावधान होते ही इसकी डीपीआर बनकर फाइलन अप्रूवल मिलेगी। गौरतलब है कि कुर्पण खड्ड में दोनों ओर बागीपुल और जहां अन्य स्थानों में बस्ती को खतरा है, उन स्थानों में सुरक्षा दीवार लगाई जाएगी। इसके लिए नदी के दोनों ओर की अलग-अलग डीपीआर बनाई जाएगी। साथ में समेज गांव के पास जो हिस्सा कुल्लू जिले में आता है, उस हिस्से के तटीकरण को लेकर भी डीपीआर बनेगी। लिहाजा, इन तीनों स्थानों के तटीकरण को लेकर जल शक्ति विभाग ने प्राइमरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। ऐसे में पीएसी ने इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति देकर डीपीआर बनाने को कहा गया है।
मची थी तबाही, सात लोग अभी भी लापता
31 जुलाई, 2024 की रात को कुर्पण नदी में बादल फटने से बाढ़ आ गई थी। इसने बागीपुल के पास तबाही बचाई थी। कई घर बह गए थे और नौ लोग भी पानी और मलबे में बह गए थे। इनमें अब तक सिर्फ दो-तीन ही मिल पाए थे, जबकि पांच लोग अभी भी लापता हैं। ऐसे में आने वाले समय में भी बागीपुल और इसके आसपास के क्षेत्र में नदी से लोगों के घरों को खतरा बना हुआ है। ऐसे में यहां तटीकरण करना जरूरी है।
कुर्पण खड्ड और समेज के पास खड्ड और नाले के तटीकरण की प्राइमरी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सरकार को भेजी थी, जिसे पीएसी ने स्वीकृति प्रदान कर ली है। अब इसकी डीपीआर बनेगी। - डॉ. गणेश ठाकुर, जिला राजस्व अधिकारी
विभाग की तरफ से तीन स्थानों में तटीकरण के लिए पीपीआर बनाई है। इसके बाद डीपीआर बनाई जाएगी, जिससे स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जा सके। - किशोर शर्मा, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग