केलांग (लाहौल-स्पीति)। चिनाब नदी के वामतट पर बसा लाहौल स्पीति का एक गांव आजादी के 70 साल बाद भी सड़क सुविधा से वंचित है। ऐसे में जनजातीय विधानसभा क्षेत्र के सलपट-2 गांव के लोग अब विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं को गांव में प्रवेश करने तक नहीं दिया जाएगा। सर्वसहमति से निर्णय लिया गया है कि अगर मतदाता गांव के फैसले के खिलाफ जाकर मतदान करता है तो उससे जुर्माना वसूला जाएगा।
सोमवार को इसको लेकर ग्रामीण नायब तहसीलदार के माध्यम से भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन प्रेषित करने जा रहे हैं। 12 घर वाले करपट-2 गांव की आबादी करीब 90 है जबकि यहां पर 50 के आसपास मतदाता हैं। सलपट-2 के युवक मंडल प्रधान राकेश कुमार और महिला मंडल प्रधान कमला देवी ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार उन्होंने विधायक, विभाग और स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है लेकिन अभी तक सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका है। सड़क की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को कृषि उत्पाद के साथ खाद्य सामग्री करीब दो किमी तक पीठ में ढोना पड़ रहा है। कृषि उत्पाद से होने वाली आमदनी का 60 फीसदी हिस्सा ढुलाई पर खर्च हो जाता है। जिससे गरीब परिवारों का जीना मुश्किल हो गया है। विभाग ने हालांकि करोड़ों खर्च कर चिनाब नदी पर पुल बनाया है लेकिन इसके आगे सड़क नहीं होने से ग्रामीणों को पुल का फायदा नहीं मिल रहा है। सरकारों और विभाग की संवेदनहीनता को देखते हुए ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर ग्रामीण सोमवार को स्थानीय प्रशासन के माध्यम से मुख्य चुनाव आयोग को ज्ञापन प्रेषित करेंगे।
वहीं, ग्रामीण युवक संगठन के संयोजक एडवोकेट सुदर्शन ठाकुर का कहना है कि इसके लिए दोनों सरकारें जिम्मेदार हैं। इस संबंध मेें लोनिवि चिनाब डिवीजन के अधिशाषी अभियंता चमन ठाकुर ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए बजट स्वीकृत है लेकिन पड़ोसी गांव के लोग इसके लिए जमीन देने को तैयार नहीं है।