अमर उजाला ब्यूरो
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्रों के लिए होने वाली शीतकालीन हेलीकॉप्टर सेवाएं लाहौल के लोगों पर भारी पड़ने लगी हैं। लाहौल के लिए बुधवार को भी हेलीकॉप्टर की दोनों उड़ानें नहीं हो सकी। हेलीकॉप्टर के शेड्यूल के अनुसार कई मरीजों को हेलीपैड तक भी पहुंचाया गया था। बारिंग और स्तींगरी दोनों हेलीपैड में मरीजों सहित कुल्लू की ओर जाने वाले यात्री पहुंच गए थे।
काफी इंतजार के बाद उन्हें सूचना मिली कि हेलीकॉप्टर वीवीआईपी ड्यूटी के लिए निकल गया है। ऐसे में हेलीपैड पर पहुंचे मरीजों सहित अन्य जरूरतमंद यात्रियों को मायूस होकर लौटना पड़ा। लाहौल के बारिंग हेलीपैड के अंतर्गत मरीजों सहित कुल्लू जाने वाले यात्री बर्फ के बीच चार किलोमीटर की चढ़ाई तय कर हेलीपैड आए थे। हेलीकॉप्टर नहीं आने से उन्हें बर्फ वाले रास्तों से होकर वापस जाना पड़ा। कई मरीजों को भारी बर्फ के बीच उठा कर हेलीपैड तक लाया गया था। उड़ान समिति बारिंग से मिली जानकारी के अनुसार उक्त हेलीपैड से नौ रेफर मरीजों को हेलीकॉप्टर का इंतजार है। इसमें एक युवा मरीज की हालात काफी गंभीर बताई जा रही है। उसे स्थानीय चिकित्सक ने तत्काल इलाज को घाटी से बाहर रेफर किया हुआ है। मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में लाया गया है। इसके बाद भी उड़ान रद्द किए जाने पर लोगों में भारी रोष है। दूसरी ओर स्तींगरी हेलीपैड में भी लोग अपने रेफर मरीजों को लेकर पहुंच गए थे। वारपा पंचायत के प्रधान सत प्रकाश और तांदी पंचायत के पूर्व प्रधान सुरेश कुमार ने इस तरह से उड़ानों में फेरबदल किया जाना या वीवीआईपी ड्यूटी पर हेलीकॉप्टर को ले जाना गलत है। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में मरीज मुश्किलों में है।