भवन पर खर्च दिए करोड़ों रुपये
फिर भी नहीं मिली स्वास्थ्य सेवाएं
सैंज अस्पताल के नए भवन में तीन सालों से लटका ताला
इलाज के लिए 50 किलोमीटर दूर कुल्लू आने को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो
सैंज (कुल्लू)। घाटी के सैंज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं हांफ गई हैं। सैंज अस्पताल के नए भवन पर निर्माण पर करोड़ों खर्च कर दिए। बावजूद इसके आज भी लोगों को इलाज के लिए 60 किलोमीटर दूर कुल्लू आना पड़ रहा है। पांच करोड़ रुपये से बने सैंज अस्पताल भवन में तीन सालों से ताले जड़ा हुआ है। ऐसे में सैंज घाटी की 15 पंचायतों की 25000 हजार आबादी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घाटी की 25000 हजार आबादी एक डॉक्टर के सहारे है।
ग्रामीण शेर सिंह, दिले राम, राजेश कुमार, मोती राम, मोहर सिंह, रूप लाल, केहर सिंह, खेवा राम, भाग सिंह, रमेश कुमार, लाल सिंह, नरेंद्र सिंह, जगदीश, राम लाल, महेंद्र सिंह, रोशन लाल, किसन चंद, श्याम लाल, मदन लाल, देविंद्र कुमार, हुकम राम, संदीप कुमार, उत्तम राम, मनोज कुमार, सरला देवी, मीरा देवी, गीता देवी, रीना देवी, लीलावंतु, सीमा देवी, राजकुमार, हरी राम और सेसराम ने कहा कि करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी अस्पताल का नया भवन बंद पड़ा हुआ है। अस्पताल में 25 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध होनी थी। वर्तमान में उपचार पुराने भवन में ही किया जा रहा है। तीन साल पहले सैंज दौरे पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सैंज अस्पताल भवन के निर्माण कार्य के लिए पांच करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति प्रदान कर इसका उद्घाटन किया था। सत्ता के बदलने के बाद अब तक अस्पताल में ताले जड़े हुए हैं और कोई इसकी सुध लेने वाले नहीं है।
लोगों के अनुसार मरीजों को उपचार के लिए 50 किलोमीटर दूर कुल्लू अस्पताल लाना पड़ता है। कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। उन्होंने मांग करते हुए कहा है कि सैंज अस्पताल नए भवन में सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए। बीएमओ बंजार डॉ रमेश चंद ने कहा कि नए अस्पताल भवन में ट्रांसफार्मर लगना है। इसके लिए बिजली बोर्ड को फाइल भेजी गई है। अस्पताल में कुछ एक जगह लीकेज आई थी उसे भी ठीक कर दिया गया है। जल्द नए भवन की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।