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बंपर फ्लावरिंग पर कीटनाशक का छिड़काव घातक

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बंपर फ्लावरिंग पर कीटनाशक का छिड़काव घातक
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अत्यधिक कीटनाशक प्रयोग से मधुमक्खी का वजूद खतरे में
फसल पैदावार के लिए फलों की सेटिंग का होना सबसे अहम
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। सेब और नाशपाती की फ्लावरिंग का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में बागवानों को बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बंपर फ्लावरिंग पर कीटनाशक की स्प्रे करने से गुरेज करें। ऐसे में जहरीले कीटनाशक के छिड़काव के कारण मधुमक्खी सहित किसानों और बागवानों के मित्र कीट मर जाते हैं। यह मित्र कीट फसलों की पैदावार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लावरिंग के समय मधुमक्खी परागण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान निभाती है। मधुमक्खी एक फूल से दूसरे फूल तक परागण को पहुंचाती हैं। ऐसे में फूलों की सेटिंग उम्दा होती है। मधुमक्खी के बाक्स को बगीचों में रखने से कई गुना पैदावार बढ़ जाती है।
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इस संबंध में जिला के प्रगतिशील बागवान अमित कुमार, रेवत राम, महावीर प्रसाद भार्गव, चंद्र सेन ठाकुर, अरूण ठाकुर तथा कैलाश ठाकुर आदि का कहना है कि तीन वर्षों से वे अपने बगीचों में मधुमक्खियों के बॉक्स फूल आने के समय रखते हैं। इससे उनके बगीचों में बेहतर फलों की सेटिंग होती है।
वहीं बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके शर्मा के अनुसार बगीचों में पॉलिनेशन की वैरायटी 25 से 33 प्रतिशत होना लाजिमी है। मधुमक्खी कर रोल परागण में अहम रहता है। एक मधुमक्खी दिन में पांच हजार फूलों पर जाती है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि उम्दा पैदावार के लिए मधुमक्खी के बॉक्स फूल आने पर अवश्य रखे।
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वहीं इस संबंध में फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष राजगीर महंत के अनुसार इस साल मधुमक्खी के बॉक्स कुरुक्षेत्र और हरियाणा से अभी 500 बाक्स पहुंच चुके हैं। जो बागवानों को 650 रूपये प्रति बाक्स से किराये पर दिए जाएंगे। अभी और बाक्स को मधुमक्खी पालकों से मंगवाए जाएंगे।
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