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चोखंग क्षेत्र में कब बजेगी मोबाइल फोन की घंटी

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अमर उजाला ब्यूरो
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उदयपुर (लाहौल स्पीति)। संचार क्रांति के इस आधुनिक युग में भी लाहौल घाटी के चार गांवों के लोग संचार सेवाओं को लेकर बेताब हैं। लाहौल घाटी के चोखंग, छोगजिंग, गवाड़ी, नैनगाहर गांवों से मोबाइल सिग्नल आज भी गायब है। सीजन के दौरान गांवों से काफी संख्या में श्रद्धालु नीलकंठ महादेव के दर्शन को जाते हैं। उन्हें भी सिग्नल की उपलब्धता न होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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दशकों से क्षेत्र के ग्रामीण और जनप्रतिनिधि बीएसएनएल के अधिकारियों से चोखंग क्षेत्र में टावर लगाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी समस्या को आज तक किसी ने नहीं सुना है। ग्रामीण बताते हैं कि मोबाइल टावर लगाए जाने को लेकर शिमला में तैनात बीएसएनएल के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं को भी अवगत करवाया लेकिन आज तक नतीजा कुछ नहीं निकला। ग्रामीणों को आज तक इसको लेकर महज आश्वासन ही मिले हैं। इसके चलते लोगों में रोष है। हालांकि, गांव में डब्ल्यूएलएल की सुविधा तो है लेकिन यह पिछले काफी समय से बंद है। मूरिंग पंचायत प्रधान गणेश लाल ने कहा कि प्रशासन ने नैनगाहर गांव में वीपीटी सेट लगा रखा है। इसमें एक मिनट का पांच रुपये बिल आता है। जहां वीपीटी सेट की सुविधा है, वह गांव भी चोखंग से आठ किलोमीटर दूरी पर है। उन्होंने मांग की है कि चोखंग क्षेत्र में एक मोबाइल टावर लगाया जाए, जिससे यहां के लोगों को भी मोबाइल की सुविधा मिल सके। इस संबंध में बीएसएनएल के केलांग स्थित एसडीओ श्याम लाल ने कहा कि अभी चोखंग क्षेत्र में मोबाइल टावर लगवाने को लेकर किसी प्रकार स्वीकृति नहीं है। स्वीकृति मिलने के बाद ही इस पर काम किया जा सकेगा।
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