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श्रद्धालुओं व सैलानियों को खुला सरयोलसर

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श्रद्धालुओं और सैलानियों
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के लिए खुला सरयोलसर
बैसाख संक्रांति यहां होगी माता की विधिवत पूजा-अर्चना
चार महीने बाद माता के दर्शन पाकर धन्य हुए श्रद्धालु
कम बर्फबारी होने एक माह पहले खुल गया धार्मिक स्थल
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। करीब 10500 फुट ऊंचे धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सरयोलसर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खुल गया है। यहां वास करने वाली माता बूढ़ी नागिन की पूजा-अर्चना देव परंपरा के तहत बैसाख संक्रांति से देवी के पुजारी की ओर से शुरू की जाएगी। इस साल यहां कम बर्फबारी होने से धार्मिक स्थल करीब एक माह पहले भक्तों के लिए खुल गया है।
माता बूढ़ी नागिन के चार माह बाद दर्शन पाकर श्रद्धालु धन्य हो गए हैं। वहीं मंदिर कमेटी बैसाख संक्रांति को लगने वाले मेले को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस दिन से महिलाएं अपनी अधिष्ठात्री को मन्नत के रूप में देसी घी का चढ़ावा देगी जो नवंबर माह तक चलती रहेगी। समय से पहले माता के कपाट खुलने से बंजार व बाह्य सराज आनी-निरमंड क्षेत्र के साथ किन्नौर, रामपुर, कुमारसेन, करसोग तथा जिला मंडी का सराज क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है।
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इस संबंध में माता के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि तय समय के अनुसार बैसाख संक्रांति से माता के पुजारी डीआर ठाकुर द्वारा माता की पूजा अर्चना शुरू करेंगे। भले ही माता की पूजा पुजारी द्वारा नहीं की जा रही है लेकिन चैत्र नवरात्र से यहां भक्तों व पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई है। पर्यटक व भक्तजन माता के दर्शन कर पूजा भी कर रहे हैं।
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पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रा के कारोबारी जय सिंह, मोहर सिंह तथा शेर सिंह ने कहा कि सरयोलसर रोजाना दर्जनों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जिसमें पर्यटक भी शामिल है। मान्यता है कि माता बूढ़ी नागिन लोगों को जहां सुख-शांति व समृद्धि प्रदान करती है तो वहीं गौ रक्षा की देवी मानी जाती है। भागे राम राणा ने कहा कि बैसाख संक्रांति से माता के दरबार में भक्तों के साथ देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाएगी।
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