कुल्लू। रोहतांग टनल बनने के बाद लाहौल-स्पीति हिमाचल का एक बेहतर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन कर उभरेगा। पर्यटन कारोबार से घाटी का पारिस्थितिक संतुलन न बिगड़े, इसको लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यटन विभाग ने होटल कारोबारियों से मिलकर काम करना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में मंगलवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहायक पर्यावरण अभियंता प्रदीप मोदगिल ने कहा कि लाहौल में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ जाने से कई तरह की जानलेवा बीमारियां पांव पसार लेती हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के साथ जल स्रोतों के दूषित हो जाने से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ेगी। ठोस और तरल कचरे को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने की भी जानकारी दी गई।
वरिष्ठ लैब सहायक कमलकांत ने कहा कि व्यावसायिक संस्थान शुरू करने के साथ बायो टायलेट की व्यवस्था रखें। 25 बेड से अधिक होटलों को सीवरेज ट्रीट प्लांट से जोड़ना अनिवार्य है। वहीं होटलियरों को नए पर्यटन संस्थान के निर्माण को लेकर कंसेंट टू एस्टेब्लिश, कंसेंट टू ऑपरेट और कंसेंट टू रिन्यूअल के बारे विस्तार से बताया। जिला पर्यटन अधिकारी बीसी नेगी ने भी पर्यटन कारोबारियों को नियमों और नए संस्थानों की पंजीकरण की जानकारी दी। इस दौरान होटल कारोबारी टशी करपा, पद्मा ठीले, सुभाष, राजेश चंद, महेंद्र और नवांग छेरिंग ने अधिकारियों से कई सवाल-जवाब किए। इस दौरान लाहौल होटलियर एसोसिएशन के सचिव टशी बरोंगप, कोषाध्यक्ष शरब राला करपा, प्रेस सचिव राजेश और दवा करपा समेत कई पर्यटन कारोबारी शामिल हुए।