अमर उजाला ब्यूरो
कोकसर (लाहौल-स्पीति)। रोहतांग सुरंग के नॉर्थ पोर्टल से आवाजाही बंद हो जाने के बाद अब जरूरतमंद लोग मजबूरन खतरा उठाकर रोहतांग दर्रा पैदल पार कर रहे हैं। आठ लोगों ने मंगलवार को बचाव चौकी कोकसर टीम की मदद से रोहतांग पार किया। दूसरे दिन बुधवार को भी दर्रे पर कदमताल जारी रहा। दर्रा पार करने वालों में नेपाली मूल के 50 वर्षीय गोपाल भी शामिल रहे।
गोपाल ने समुद्रतल से 13050 फीट ऊंचे दर्रे को पार करने के लिए पांच किलोमीटर बर्फीली सीधी चढ़ाई को चार घंटे में पार किया। बचाव चौकी के प्रभारी पवन ठाकुर ने बताया कि कुल 24 लोगों ने बचाव चौकी में अपना नाम पंजीकृत किया। लेकिन गोंधला के तीन लोग राक्षी ढांक की चढ़ाई को नहीं चढ़ पाए और वह अपने घर वापस हुए। बताया कि 21 लोगों को कोकसर और मढ़ी बचाव टीम की मदद से रोहतांग दर्रा पार करवाया, जिनमें कुल्लू के विभिन्न क्षेत्रों और नेपाली मूल के लोग शामिल थे। मनाली से कोकसर की ओर 12 लोग गए। इसके अलावा कोकसर से मनाली की ओर से 24 लोग आए। इनमें से तीन लोग आधे रास्ते से लौट गए और 21 मनाली पहुंच गए। उन्होंने बताया कि मौसम अनुकूल होने पर धीरज, राकेश, नितेश, अर्जुन, अनुज, रविंद्र, रमेश, लाल चंद, शिव राम, मोहिंद्र, राम चंद, सुनील, मनजीत सिंह, नरेश, विकेश, संदीप, मंजीत व टेकचंद ने रोहतांग दर्रा को पैदल लांघा है। उन्होंने बताया कि सात घंटे के पैदल सफर के बाद लोगों को मढ़ी से मनाली के लिए वाहन मिले। उल्लेखनीय है कि रोहतांग दर्रा बर्फबारी के बाद बंद होने से लाहौल घाटी के लोगों को घाटी के बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।