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शहर में इधर-उधर पड़ा 45 टन कूड़ा-कचरा

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। कूड़े-कचरे की डंपिंग साइट पांच दिनों से बंद होने से कुल्लू शहर दिन प्रतिदिन गंदा होता जा रहा है। शहर के कोने-कोने में गंदगी के ढेर लगने से शहरवासी बेहाल हैं। पांच दिनों से शहर में करीब 45 टन कूड़ा इकट्ठा हो गया है।
नगर परिषद कुल्लू में रोजाना करीब नौ टन कूड़ा निकलता है। इसमें नगर परिषद कुल्लू का डोर टू डोर स्कीम का कचरा भी शामिल है। लेकिन पिरड़ी डंपिंग साइट बंद होने से प्रशासन और नगर परिषद की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं। 6.68 वर्ग किलोमीटर में फैले नगर परिषद के क्षेत्रफल का वातावरण पूरी तरह से प्रदूषित होता जा रहा है। लेकिन प्रशासन व नगर परिषद किसी ठोस निर्णय पर नहीं पहुंच रहा है। बल्ह पंचायत व वन अधिकार समिति ने एनजीटी के आदेशों का हवाला देकर नगर परिषद को बैकफुट पर ला दिया है। ऐसे में इस गंभीर मसले को लेकर अधिकारी भी कुछ कहने से बच रहे हैं। शहरवासी संजय कुमार, सीता राम, डोला राम, बुद्धि सिंह, प्रकाश चंद, जगदीश, मोहर सिंह ठाकुर, रमेश चंद, राम सिंह, गुमत राम तथा राजीव ने कहा कि शहर कूड़े के ढेर में तबदील है और प्रशासन व नगर परिषद को किसी तरह की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या का हल नहीं होने से इसका असर लोगों की सेहत पर भी देखने को मिलेगा। हालांकि कुछ इलाकों में एकत्रित हुए कचरे को जलाया जा रहा है। इससे भी वातावरण को प्रदूषित किया जा रहा है। हिमालयन पर्यावरण संरक्षक संगठन के अध्यक्ष अभिषक रॉय ने कहा कि खुले में कूड़े को जलाना एनजीटी के आदेशों की अवहेलना है। वायु प्रदूषण अधिक बढ़ने से कई बीमारियां फैल सकती हैं।
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कूड़ा छंटनी की मशीन सालों से खराब
कुल्लू। शहर में कूड़े को डोर टू डोर योजना के तहत इकट्ठा किया जाता है। इसके बाद सफाई कर्मियों की ओर से इसकी छंटनी की जाती है। ठोस कचरे को बिलासपुर के बरमाणा भेजा जाता है। अन्य कूड़े की पिट से खाद बनाई जाती है। हालांकि पिरड़ी में कूड़ा छंटनी के लिए मशीन भी लगाई गई है, जो सालों से खराब पड़ी है। कड़ा निष्पादन के लिए नगर परिषद महीने का करीब सवा तीन लाख रुपये खर्च करती है।
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