कुल्लू और मनाली शहरों
तक ही सीमित क्रैश बैरियर
68 ब्लैक स्पॉट चिन्हित, नहीं थमा हादसों का सिलसिला
अधिकतर सड़कों में पैरापिट नहीं, गड्ढों से लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। देश-विदेश में बागवानी और पर्यटन के मशहूर कुल्लू घाटी में सड़कों की हालत बेहद खराब है। एनएच-21 को कुछ हिस्से को छोड़कर भुंतर-मणिकर्ण, कुल्लू-मनाली वाम तट सहित दर्जनों सड़कों में गड्ढों की भरमार है। वहीं कुल्लू मनाली एनएच पर फोरलेन निर्माण के चलते लोगों के साथ पर्यटक भी परेशान हैं। जिला की अधिकतर सड़कों में पैरापिट नहीं लगे हैं। सड़क किनारे पैरापिट और क्रैश बैरियर न होने से कई बार यहां हादसे हो चुके हैं। हालांकि कुल्लू जिला में 68 और जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में 14 ब्लैक स्पॉट चिहिन्त किए गए हैं। जिसमें मणिकर्ण घाटी में 9, मनाली उपमंडल में 10, निरमंड में तीन, आनी में 9, कुल्लू शहर के आसपास 8, भुंतर में 3, बंजार में 7 और सैंज में 6 ब्लैक स्पॉट चिहिन्त हुए हैं। जिनमें हादसों को लेकर अंदेशा बना हुआ है। कई लोग खस्ताहाल सड़कों पर अपनी जान गवां चुके हैं लेकिन इसके बावजूद अभी तक न तो प्रशासन ने सबक लिया है और न ही विभाग ने इस संबंध में कोई ठोस कदम उठाया है।
वर्ष 2015 में सरसाड़ी में एक बस तंग सड़क होने के कारण नदी में गिर गई थी। इसके बाद सड़क को चौड़ा करने का काम शुरू हुआ। जो आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। सरसाड़ी के ब्लैक स्पॉट सहित कई अन्य जगहों पर हादसे पेश आ सकते हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता डिविजन एक हिमांशु बिष्ट ने कहा कि जितने भी ब्लैक स्पॉट है उसमें हादसों के कारणों का पता लगाकर उसे नए सिस्टम के तहत ठीक किया जा रहा है। इसके अलावा सड़कों में पैरापिट और क्रैश बैैरियर फंड मिलने पर लगाए जाते हैं।
सरसाड़ी में हुआ था बस हादसा
वर्ष 2015 में मणिकर्ण घाटी के सरसाड़ी में बस अनियंत्रित होकर पार्वती नदी में समा गई थी। जिसमें करीब 45 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 15 लोग घायल हो गए थे। घटना वाले स्थल पर अगर पैरापिट होते तो पर्यटकों की जान बच जाती।