सेब के बगीचों में सूली कीट
का कहर बरपा, बागवान चिंतित
सेब के पौधों की जड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा कीड़ा
कीट के प्रकोप से सूख रहे पेड़ों से घाटी के बागवान बैकफुट पर
अमर उजाला ब्यूरो
खराहल (कुल्लू)। जिले के विभिन्न इलाकों में सेब के पौधों पर सूली नामक कीट का कहर बरपा है। इन दिनों तौलिये बनाते समय इस कीट को देखा जा रहा है। कीट के प्रकोप से कई पौधे सूखने लगे हैं। बागवानों का कहना है कि दवा के उपचार के पश्चात भी कीट पर नियंत्रण नहीं हो रहा है। ऐसे में बागवान अपने बगीचों में लगे कीट के प्रकोप से काफी चिंतित हैं।
एक सर्वेक्षण के अनुसार कुल्लू घाटी के विभिन्न बगीचों में 1.6 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक पौधे इस कीट के प्रकोप से ग्रस्त हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि यदि बागवान एहतियात बरतें तो जड़ छेदक कीट पर पूर्णरूप से नियंत्रण पाया जा सकता है। घाटी के बागवान अमित ठाकुर, पंकज कुमार, अमन, सुशील ठाकुर, रमेश, कमल, ज्ञान ठाकुर, कर्मचंद, जयचंद, रोशन लाल, नवीन, बुद्धि प्रकाश शर्मा और अखिल राणा आदि का कहना है कि उनके बगीचों सूली कीट कई पौधों को तबाह कर रहा है। दवा के उपचार के बाद भी कीट पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में हर साल कई पौधे इसके हमले से सूख रहे हैं।
बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड की अपेक्षा गर्म इलाकों में इस कीड़े का प्रकोप ज्यादा होता है। रेतीली और दोमट मिट्टी में सेब के बगीचों में कीट का अधिक हमला होता है। कीट पौधों की जड़ों को खा लेता है और अंदर ही अंदर पौधे खोला हो कर सूख जाते हैं।
बागवानी विभाग के उप निदेशक डॉ. आरके शर्मा के अनुसार जड़ छेदक कीट को पूर्णरूप से नियंत्रित किया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे पौधों की पहचान कर उनकी मिट्टी हटाकर कीड़ों को मार देना चाहिए। डरमट, डरसवान, मासवान और डेनुसवान 20 ईसी नामक कीटनाशक दवा 40 मिली दस लीटर पानी में मिलाकर ग्रसित पौधों की जड़ों में डालें।