खराहल (कुल्लू)। ब्यास की धारा को मैली होने से बचाने के लिए प्रशासन और नगर परिषद ने कड़े नियमों का प्रावधान तो कर रखा है, लेकिन अभी भी नदी में कूड़ा कर्कट बदस्तूर फेंका जा रहा है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर मनाली से लेकर इसके साथ बसे शहर और कस्बे की गंदगी नदी में मिल रही है। यही हाल मणिकर्ण घाटी से निकलने वाली पार्वती नदी, सरवरी नदी का भी है।
एक रिपोर्ट के अनुसार पानी में बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन मानकों से कम पाया गया है। लिहाजा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए कारगर कदम उठाने के दिशा निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी ब्यास नदी में कुछ लोग आज भी गंदगी को बदस्तूर फेंक रहे हैं।
पर्यावरणविद एवं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किशन लाल ने कहा कि यह मामला काफी गंभीर है। सरकार को सुनियोजित ढंग से इन नदियों को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए। जीवी हिमालय एवं पर्यावरण विकास के वरिष्ठ वैज्ञानिक जेसी कुनियाल ने कहा कि सरकार को इस संबंध में कड़े कदम उठाने होंगे। ब्यास और पार्वती नदियों में लगातार प्रदूषण का बढ़ना चिंता का विषय है। प्रदूषण को कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा। सरकार को इसके लिए ठोस नीति बनानी होगी।
इधर, नगर परिषद के जिला उपाध्यक्ष गोपाल महंत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है। ब्यास को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा सूचना बोर्ड लगाकर भी नदियों में कूड़ा कर्कट न फेंकने की हिदायत दी गई है। वहीं, आईपीएच विभाग के अधिशाषी अभियंता केआर कुल्लवी ने बताया कि शहर के हर घर को सीवेरज से जोड़ा जा रहा है। 3021 मकानों में से 2376 मकानों को सीवेरज से जोड़ दिया है। बाकी घरों को जोड़ने का काम चल हुआ है।