शांघड़ में हजारों पर्यटक दे रहे दस्तक
सुविधाओं के अभाव के बावजूद पहुंच रहे सैलानी, 228 बीघा का मैदान बना आकर्षण
अमर उजाला ब्यूरो
सैंज (कुल्लू)। प्रसिद्ध शांघड़ मैदान को देखने के लिए देश, विदेश से हजारों पर्यटक दस्तक देने लगे हैं। लगभग 228 बीघा में फैले शांघड़ के मैदान को देखने वालों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। कुल्लू से 58 किलोमीटर की दूरी पर बसा शांघड़ गांव सैंज घाटी के अंतिम छोर पर है। एक हजार से अधिक आबादी वाले शांघड़ को भी अपने मैदान से पहचान मिली है।
देवता की पूरी जमीन का आधा हिस्सा ऐसा है, जो ब्राह्मण, पुजारी, मुजारों, बजंतरी व गुर सहित अन्य देव कारकूनों को दिया गया है। आधा हिस्सा गो चारे के रूप में खाली रखा गया है। बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि बंजार विस में अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। उधर, जिला पर्यटन अधिकारी भाग चंद नेगी ने कहा कि शांघड़ को प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नई राहें नई मंजिलें के तहत विकसित किए जाने की स्कीम है। पूरे क्षेत्र को ध्यान में रखकर योजना तैयार की जा रही है। डीसी डॉ. ऋचा वर्मा ने कहा कि पूरे जिले में कई अनछूए पर्यटन स्थलों में पर्यटकों के लिए सुविधाएं मुहैया करवाई जाएगी और स्थानीय लोगों को पर्यटन कारोबार से जोड़ा जाएगा।
मैदान में आने वालों के लिए कड़े नियम
शांघड़ विश्व धरोहर साइट ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र का भीतरी हिस्सा है। शांघड़ में अपवित्रता न फैले, इसके लिए यहां के ईष्ट देव शंगचूल महादेव की मंदिर कमेटी ने कायदे-कानून भी बनाए हैं। यह मैदान यहां शंगचूल महादेव का आवास स्थल है। मैदान तक वाहन लाने, गंदगी फैलाने, शराब पीकर आने तथा पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों के पेटी और टोपी पहनकर आने की सख्त मनाही है।
पर्यटन स्थल में सुविधाओं का है अभाव
शांघड़ पर्यटन स्थल में सुविधाओं के अभाव में सैलानियों को दिक्कत होती है। यहां सरकार ने प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बस योग्य सड़क का निर्माण किया है। कच्ची सड़क होने के कारण यहां तक वाहन पहुंचाने में मुश्किल होती। सार्वजनिक शौचालय, शुद्ध पेयजल आदि का अभाव है।
मंदिर से जुटी कहानी है रोचक, आकर्षक
सैंज (कुल्लू)। शांघड़ में शंगचूल महादेव का अधिक प्राचीन मंदिर है। इस गांव में आज भी पांडव के समय की ऐतिहासिक धरोहरें मिलती हैं। शंगचूल महादेव के पुजारी ओम प्रकाश, कुलदीप शर्मा और रूपेंद्र राणा ने कहा कि इस मंदिर में किसी भी जाति का प्रेमी युगल शरण ले सकता है। मंदिर का ओरण करीब 100 बीघा में फैला हुआ है। ओरण में प्रेमी युगल के प्रवेश करने के बाद वह मंदिर के देवता की शरण में आ जाता हैं। मामला न सुलझने तक मंदिर के पंडित प्रेमी युगलों की खातिरदारी करते हैं। दिल्ली से आए दिनेश, आदित्य, शालिनी आदि पर्यटकों ने कहा कि उन्होंने इस कहानी को पढ़कर ही यहां आने की योजना बनाई।