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11 मिडल स्कूलों में बच्चों की संख्या दस से कम

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। जिले के प्राइमरी स्कूलों में विद्यार्थी साल दर साल कम होते जा रहे हैं। लेकिन शिक्षकों के अभाव के कारण पढ़ाई में आ रही मुश्किलों के बाद अब मिडल स्कूलों में बच्चों की संख्या घटने लगी है।
जिले में 11 मिडल स्कूल ऐसे हैं, जहां पर अब बच्चों की संख्या दस से कम रह गई है। ऐसे में इन स्कूलों को मर्ज किया जा सकता है। उच्च अधिकारियों की ओर से मांगी गई रिपोर्ट को विभाग ने सौंप दिया है। लेकिन अभी तक सरकार ने इन स्कूलों को मर्ज नहीं किया है। बताया जा रहा है कि मिडल स्कूल लपाह, भूपन, कोटासेरी, बुआई, अनस, मथाना, बड़ोगी, प्रोहधार आदि में छात्रों की संख्या दस से कम रह गई है। छात्रों की संख्या दस से कम होने से इन स्कूलों पर दूसरे स्कूलों में मर्ज किए जाने का संकट गहराया है। इसका असर न केवल यहां के विद्यार्थियों पर पड़ेगा, बल्कि यहां के स्टाफ को भी दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि मिडल स्कूलों में दस से कम बच्चों वाले स्कूल बहुत कम है। हालांकि प्राइमरी स्तर पर स्कूलों की यह संख्या अधिक है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने 23 जनवरी 2018 को शिक्षा उपनिदेशक को पत्र जारी कर पूछा था कि जिले में कितने मिडल स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की संख्या शून्य से दस के बीच है। इस पर दो फरवरी 2018 को जवाब में इसकी एक रिपोर्ट तैयार कर भेजी थी। इन स्कूलों की सूची तैयार की गई थी। इसमें कहा गया था कि दस से कम संख्या वाले स्कूलों को मर्ज किया जाएगा।
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छात्रों की संख्या बढ़ाने की जरूरत
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक पुष्पा कांढा ने कहा कि विभाग के 11 मिडल स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की संख्या दस से कम रह गई है। उन्होंने कहा कि विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी एक रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है। फिलहाल कुल्लू में किसी भी स्कूल को मर्ज नहीं किया गया है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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