भीषण गर्मी में रैला की पांच हजार आबादी को जलसंकट
पेयजल के लिए लोगों में त्राही-त्राही, पेयजल स्रोत सूखे
टनल और सड़क निर्माण के विस्फोट से पैदा हुई समस्या
हरि रामचंद्र चौधरी
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी में जल विद्युत परियोजनाएं सुविधाओं के साथ कई समस्याएं भी लेकर आई हैं। रैला पंचायत में परियोजनाओं का सर्वाधिक काम हुआ है। भूमिगत टनलों से पूरी पंचायत खोखली हो गई है। इससे आम जनमानस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पंचायत में अधिकतर प्रकृतिक पेयजल स्रोत सूख चुके हैं। राहत के तौर पर जिस उठाऊ पेयजल योजना का निर्माण कार्य सात साल पहले शुरू किया गया था, वह योजना अभी भी तैयार नहीं हो पाई है।
पंचायत में इन दिनों भीषण पेयजल संकट गहराया हुआ है। समस्या 18 वर्ष पहले ही पैदा हो गई थी जब पंचायत में टनलों की खुदाई का काम चालू हुआ था। सात साल पहले उन्हें भरोसा हो गया था कि अब समस्या का स्थायी समाधान होगा लेकिन विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली आड़े आ गई है। जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से सैंज उपतहसील की सबसे बड़ी पंचायत में पेयजल के
लिए त्राही-त्राही मची हुई है। पांच हजार से अधिक आबादी वाली इस पंचायत में पेयजल की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। विभाग इस समस्या को हलके से ले रहा है। रैला पंचायत में वर्ष 2000 में पार्वती परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। टनल, पावर हाउस और सड़क निर्माण के दौरान भारी विस्फोट होने से पेयजल के करीब सभी स्रोत सूख गए। पेयजल की किल्लत से पंचायत के रैला, भाटकंडा, मझग्रां, अपर रैला, टमूल, घाटसेरी, सइनधार, पाशी, शरोह, शेतीटोहल, शरण, जीवा, खड़ोआ और शुलगा गांव बुरी तरह से प्रभावित हुए।
रैला गांव के पवन रॉयल, टेक सिंह, दुर्गा धामी, उत्तम सिंह, धनी राम, मेहर सिंह, शरण गांव के भूमि चंद, लुदर सिंह, इंद्र सिंह, यान सिंह, गिरधारी लाल, बेली राम और ऐले राम ने बताया कि ग्रामीण वर्षों से पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। समाधान के लिए परियोजना प्रबंधन, सरकार और विभाग से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है। अब परियोजना का दंश झेल रहे लोग भगवान भरोसे जीने को मजबूर हैं। पंचायत के लोगों ने पेयजल के लिए पार्वती परियोजना प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन भी किए। इसके बाद परियोजना का निर्माण कर रहे भरत सरकार के उपक्रम एनएचपीसी ने एक करोड़ 70 लाख सिंउड-रैला उठाउ पेयजल योजना के लिए 2010 में जारी कर दिए। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने 2012 में इस योजना का टेंडर भी लगा दिया, लेकिन कछुआ गति से निर्माण कार्य चलने से 7 वर्षों से लोग अभी भी पानी के लिए भटक रहे हैं। पेयजल योजना का पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन जिस जगह पर इसका पहला स्टोर टैंक बनना प्रस्तावित है, उस भूमि का अधिग्रहण करना विभाग भूल गया। स्थानीय पंचायत समिति की सदस्य प्रतिभा पालसरा, प्रधान खीमदासी और उप प्रधान बालमुकुंद ने कहा कि विभाग और ठेकेदार की लेटलतीफी के कारण लोग परेशान हैं। ग्रामीणों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए इस योजना को शीघ्र पूरा करने की मांग की है।
ग्रामीण पवन रायल ने कहा कि पंचायत में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। तीन-चार किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पानी न होने के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या बिगड़ रही है। उन्होंने विभाग से निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
रैला पंचायत की प्रधान खीमदासी ने कहा कि समस्या को लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों से पंचायत का प्रतिनिधिमंडल मिल चुका है। सरकार और परियोजना प्रबंधन को भी सूचित किया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया है।
युवक मेहर सिंह ने कहा कि परियोजना के निर्माण के दौरान लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी है। पेयजल की समस्या इसमें सबसे बड़ी है। टेंडर होने के बाद भी काम न होने से लोग दुखी हैं। विभाग की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
रैलावासी रमेश धामी ने कहा कि पानी का इंतजार काफी लंबा हो गया है। पंचायत के लोगों ने 18 वर्ष कष्ट झेले हैं। अपने हकों के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है। अब राहत कार्य में हो रही देरी से परेशान हैं।
आईपीएच लारजी के एसडीओ अश्वनी कुमार ने कहा कि उक्त उठाऊ पेयजल योजना के टैंक के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। सभी औपचारिकताएं पूरी कर भू-अधिग्रहण अधिकारी को सौंपी जा चुकी है। विभाग को भूमि हस्तांतरण होते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।