अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। कुल्लू में ड्रग्स की चपेट में आने वाले युवाओं के लिए क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू का डी एडिक्शन सेंटर आशा की किरण बनकर उभरा है। अस्पताल के नशा निवारण केंद्र में आकर युवा नशे से छुटकारा पा रहे हैं। पिछले 11 महीनों में जिले से करीब 431 युवा नशा छोड़ने के लिए आए। इनमें से 393 युवाओं ने नशे को हमेशा के लिए न कह दिया है।
38 युवा अपनी कमजोर इच्छा शक्ति के कारण नशे की लत से अभी बाहर नहीं आ सके। लेकिन 393 युवाओं ने हमेशा के लिए नशे को न कह दी है। अस्पताल में नशा छोड़ाने वालों में अधिकतर संख्या चिट्टा लेने वालों की थी। चिट्टे की लत छुड़ाने के लिए सेंटर में कई लड़कियां भी आ रही हैं। इन युवाओं की उम्र 16 से 25 साल के मध्य है। इससे अधिक उम्र के लोग चरस और शराब की लत छुड़वाने के लिए सेंटर में आ रहे हैं। इसके लिए 108 नंबर कमरे में डॉक्टर भी मौजूद हैं। मरीजों को दाखिल करने के लिए छह बिस्तरों की सुविधा भी दी गई है। यहां पर नशे की लत छुड़वाने के लिए युवाओं को सात से पंद्रह दिनों तक रखा जाता है। इसमें से 90 फीसदी लोग उपचार के बाद ठीक हो जाते हैं। 10 प्रतिशत लोगों को ही नशा निवारण केंद्र की आवश्यकता पड़ती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील चंद्र ने कहा कि डी एडिक्शन सेंटर में 11 महीनों में अभी तक कुल्लू के 393 युवाओं ने नशा छोड़ा है। इन युवाओं का सेंटर में आने के बाद उपचार किया गया। डी एडिक्शन सेंटर से ड्रग्स की लत छुड़वाने में युवाओं को मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी युवा नशा छुड़वाना चाहता है तो अस्पताल में कमरा नंबर 108 में संपर्क कर सकता है।