कुल्लू में 52 फीसदी तक लुढ़का सेब उत्पादन
एक करोड़ पेटियों के मुकाबले 48.5 लाख बॉक्स
मौसम की बेरुखी ने तोड़ी बागवानों की कमर
रोशन ठाकुर
कुल्लू। बागवानी के लिए मशहूर कुल्लू घाटी में लगातार दूसरे साल सेब उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। घाटी में 2017 में करीब 48.5 लाख सेब पेटियों का उत्पादन हुआ है, जबकि 2016 में 56 फीसदी कम यानी 47 लाख सेब पेटियों की पैदावार हुई थी। घाटी में एक करोड़ से भी अधिक सेब पेटी के उत्पादन की क्षमता है और 2010-11 में जिला कुल्लू में रिकार्ड 2.04 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था।
जिला कुल्लू में बागवानी आर्थिकी की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन घाटी में मौसम की बेरुखी और असमय बारिश से सेब उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जिले में 90 फीसदी परिवार बागवानी से जुड़े हैं तथा घाटी में 26 हजार से अधिक हेक्टेयर में सेब के बगीचे लगाए गए हैं। देश और दुनिया में सेब उत्पादन के लिए विख्यात कुल्लू जिले में हिमाचल प्रदेश में शिमला के बाद सबसे अधिक उत्पादन किया जाता है, लेकिन बागवानी विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस साल जिले में 52 प्रतिशत कम यानी 48.5 लाख सेब पेटियां हुई हैं। बागवानी विशेषज्ञ इसे जिले में बदलते मौसम को कारण मान रहे हैं। घाटी में मौसम की बेरुखी तथा असमय बारिश और बर्फबारी से घाटी के सेब उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। इस साल घटे सेब उत्पादन पर भी मौसम की मार पड़ी है। प्रगतिशील बागवान अमृत सिंह मेहता, देवी सिंह, राम लाल ठाकुर, बालक राम, जगदीश ठाकुर, रंजीत राठौर तथा दलीप सिंह ने कहा कि बागवानी जिले के लोगों का मुख्य साधन है, लेकिन साल दर साल मौसम की बेरुखी से उनको लाखों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उद्यान विभाग कुल्लू के उपनिदेशक डॉ. राज कुमार शर्मा ने कहा कि इस साल सेब की फसल बहुत कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 48.5 लाख सेब पेटी का उत्पादन हुआ है।
मौसम ने तोड़ी बागवानों की कमर
फ्लावरिंग के समय हुई असमय बारिश के बाद पड़ी एकाएक ठंड से सेब उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद अप्रैल और जून में हुई भारी ओलावृष्टि और तूफान ने बागवानों की कमर तोड़ दी है। जिले के लगवैली, बंजार, सैंज, मणिकर्ण, रघुपुर, निरमंड तथा आनी के कई इलाकों में ओलावृष्टि से बागवानों को 60 से 80 फीसदी तक नुकसान उठाना पड़ा।
जिले में छह सालों में हुआ सेब उत्पादन
वर्ष सेब उत्पादन पेटियों में
2012 71.4 लाख
2013 87.8 लाख
2014 61.2 लाख
2015 71.9 लाख
2016 47.0 लाख
2017 48.5 लाख