काईस (कुल्लू) सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी मुहैया करवाने के लिए पेयजल योजनाएं तो बना रखी है, लेकिन ये योजनाएं कहीं आधी-अधूरी तो कहीं पूरी होने के बाद भी हांफती हुई नजर आ रही हैं। पेयजल योजनाओं का कार्य कई सालों से चला हुआ है लेकिन योजना का निर्माण कार्य कछुआ चाल से चला हुआ है। मणिकर्ण घाटी के तहत पीणी-तलपीणी पंचायत के दो दर्जन गांवों को जोड़ने वाली पिनस-पीणी योजना का निर्माण 2013-14 में शुरू हुआ था, लेकिन इस पेयजल योजना ने अभी तक पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है। पिनसू से शाड़ीआगे तक पाइप बिछा दिए गए हैं। लाखों की लागत से बनी पेयजल योजना के पाइप बिना पानी के जंग खा रहे हैं। वहीं सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग भी इस पेयजल योजना को चालू करवाने में नाकाम साबित हो रहा है। विभाग को ग्रामीणों की कोई परवाह नहीं है। पानी नहीं मिलने से लोगों को खड्ड का पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीण मोहर सिंह, महेंद्र सिंह, शिव चंद, रोशन लाल, गिरिधर, टेहल सिंह, चोलू राम, ख्याल चंद, योग राज तथा चंदे राम आदि ने कहा कि बंद पड़ी योजना के बारे में कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन विभाग उचित कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने कहा कि पेयजल योजना लटकने से लोगों को मजबूरन खड्ड का पानी पीना पड़ रहा है। उन्होंने विभाग से पिनसू-पीणी पेयजल योजना को जल्द सुचारु करने की मांग की है।
सहायक अभियंता आईपीएच विभाग भुंतर के अशोक भूपल ने कहा कि मामला मेरे ध्यान में है। ठेकेदार की लापरवाही के कारण पेयजल योजना का कार्य अधर में लटक गया है। ठेकेदार को एक बार नोटिस दिया था और अब एक और नोटिस दिया जाएगा। अगर इसके बावजूद पेयजल योजना का कार्य शुरू नहीं करेगा तो पेनाल्टी लगाई जाएगी तथा पेयजल योजना का कार्य दूसरे ठेकेदार को आवंटित किया जाएगा।