मार्कंडेय ऋषि, त्रिपुरा बाला सुंदरी के समक्ष नहीं होगी बलि
प्रशासन और देव कमेटी सदस्यों ने मिलकर लगाई बलि प्रथा पर लगाई रोक
बलि को लेकर दो गुटों में विवाद बढ़ने के बाद लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
बंजार (कुल्लू)। देवभूमि कुल्लू के देवी देवताओं की सदियों पुरानी देव परंपराओं का निर्वहन आज भी हो रहा है, लेकिन बंजार में एक परंपरा को पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। बलागाड़ पंचायत के आराध्य देवता मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के समक्ष अब बलि नहीं दी जाएगी। देवताओं के समक्ष बलि प्रथा पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी है। प्रशासन के साथ देवता कमेटी सदस्यों और हारियानों ने मिलकर यह अहम फैसला लिया है। हारियानों को भी बलि प्रथा को लेकर रोक लग गई है ।
ग्रामीण कमलेश नेगी, लोत राम, सुनील भारद्वाज, गिरधारी लाल, पूर्ण चंद ने कहा कि इस मुद्दे को
लेकर माननीय न्यायालय में अपील भी की गई है। मामला विचाराधीन है। कुछ माह पहले कुछ लोगों ने वलागाड़ पंचायत में बलि प्रथा को बहाल करने के लिए कई हथकंडे अपनाए और लोगों को इसके प्रति उकसाने का भी प्रयत्न किया। कई बार तो क्षेत्र में बलि प्रथा को लेकर हाथापाई भी
हुई। बंजार थाने में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। इस पर प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए
दोनों पक्षों को बंजार बुलाया और उनके साथ बैठक की। इसके बाद यह निर्णय लिया गया है। अब पंचायत में बलि प्रथा पर पाबंदी रहेगी। गौर रहे कि पिछले दिनों बलि प्रथा को लेकर दो गुटों में आपसी विवाद हो गया था। मामला थाने तक जा पहुंचा। प्रशासन को बीच बचाव करते हुुए ग्रामीणों देवता कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक करनी पड़ी है।
एसडीएम बंजार एमआर भारद्वाज ने कहा कि देवता कमेटी और हारियानों से मिलकर यह निर्णय
लिया है कि अब बलागाड़ पंचायत में देवता मार्कंडेय ऋषि के साथ माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के हारियानों में पशु बलि पर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा। डीएसपी आशीष शर्मा ने कहा कि दोनों पक्षों बली प्रथा पर सहमति बनी है।