अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला कुल्लू में इस सीजन का पहला स्क्रब टायफस का मामला सामने आया है। जांच में 11 साल के बच्चे में स्क्रब टायफस के लक्षण पाए गाए हैं। इससे कुल्लू घाटी में हड़कंप मच गया है। स्क्रब टायफस की चपेट आया बच्चा राजस्थान का बताया जा रहा है जो जिला मुख्यालय ढालपुर के हनुमानीबाग में रहता है। इसका क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में उपचार चल रहा है। कुल्लू अस्पताल के विशेष डॉ. अजय बौध तथा डॉ. अमर सिंह ने कहा कि यह बच्चा उपचार के लिए अस्पताल लाया गया था। स्क्रब टायफस की आशंका को देखते हुए टेस्ट लिए गए, जिसमें वह पॉजीटिव पाया गया है। उन्होंने कहा कि स्क्रब टायफस से निपटने के लिए डॉक्सीस्लादन दवा है जो मरीजों को निशुल्क दी जाती है और बच्चे पर चिकित्सक नजर रखे हुए हैं। उधर, घाटी में स्क्रब टायफस के पांव पसारने से लोगों में दहशत का माहौल है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी कुल्लू जिले में चार से अधिक लोगों की स्क्रब टायफस की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रम कटोच ने कहा कि स्क्रब टायफस एक जानलेवा बीमारी है। समय पर इसका उपचार न करने पर मरीज की जान भी जा सकती है। लक्षण के बाद उपचार करने पर इस पर काबू पाया जा सकता है। यह रोग एक जीवाणु विशेष से संक्रमित पिस्सु के काटने से फैलता है।
बीमारी के लक्षण
-तेज बुखार आना। यह 104 से 105 डिग्री तक हो सकता है।
-रोगी के जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना।
-शरीर में अकड़न या शरीर टूटने सा लगता है।
-अधिक संक्रमण में रोगी की गर्दन, बाजुओं के नीचे कूल्हों के ऊपर गिल्टियां होना।
बाक्स
बीमारी से बचाव
-घर के आसपास उगी घास की सफाई करना।
-खरपतवार को उगने न देना।
-आवास के अंदर और आसपास कीटनाशक दवा का छिड़काव करना।
-खेतों में काम करने पर टांग, पांव और बाजू को ढककर रखें।
-लक्षण होने पर चिकित्सकों को दिखाएं।