कुल्लू। प्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने रविवार को देवसदन में पंजीकृत एलोपैथिक फार्मासिस्ट के लिए कंटीन्यू फार्मेसी एजुकेशन (सीपीई) कार्यक्रम का आयोजन किया है। इस अवसर पर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुशील चंद्र शर्मा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए।
उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य विभाग एक ही छतरी के नीचे कार्य करते हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट का यह दायित्व है कि मरीज को दवा तथा बीमारी के बार मेें जागरूक करें। मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) चिंता का विषय है। मरीजों द्वारा उचित मात्रा व उचित मार्गदर्शन के बिना ली गई दवा नुकसानदायक है। स्क्रब टायफस जैसे रोग में जनता में धारणा है कि डॉक्सीसाइक्लीन दवा ले लेने से आराम हो जाएगा। यह धारणा गलत है व किसी भी बीमारी में चिकित्सक की सलाह लिए बिना कोई भी दवा लेना घातक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने तपेदिक बीमारी पर भी फार्मासिस्ट को जागरूक किया।
इस दौरान कुल्लू जिला के वरिष्ठ फार्मासिस्टों को सम्मानित किया गया। काउंसिल ने 1925 में जन्मे सबसे उम्रदराज फार्मासिस्ट स्वर्ण सिंह चौधरी को सम्मानित किया गया। इसके अलावा जगदीश कपूर, अमर नाथ वर्मा, सुंदर सिंह ठाकुर, गंगा राम चंदेल, कश्मीरी लाल, भूप सिंह, चेतनानंद, तेजेंद्र चौधरी, ध्यान सिंह, गनथू राम, धन चंद, गोपाल कृष्ण शर्मा,पृथी पाल चौधरी, ताबे राम, सुरेंद्र कुमार टंडन, परमानंद ठाकुर, संतोष गौड़, दलेर सिंह को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के सदस्य एवं जिला अस्पताल कुल्लू के फार्मासिस्ट संघ के अध्यक्ष सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि बुजुर्ग फार्मासिस्ट सम्मान के योग्य हैं। यह फार्मासिस्ट उस समय से कार्य कर रहे हैं जब प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं जनता की पहुंच में सुगम नहीं थी। कार्यक्रम में प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार कमलेश नाइक, अध्यक्ष गोपाल शर्मा, अतिरिक्त दवा नियंत्रक मनीष कपूर, दवा निरीक्षक दिनेश गौतम, कार्यक्रम के अध्यक्ष योगेश वर्मा, जिला दवा विक्रेता संघ कुल्लू के अध्यक्ष ऋषभ कालिया, बिहारी लाल गुप्ता, सचिन चौधरी सहित जिला कुल्लू, मंडी, बिलासपुर तथा लाहौल एवं स्पीति जिला के फार्मासिस्ट मौजूद रहे।