अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। जिला अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सकों की कमी खल रही है। अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में एक माह से ताला लटका है। इसके चलते मरीजों को निजी अस्पताल में मजबूरन महंगा उपचार करना पड़ रहा है। कुछ माह पूर्व यहां दो नेत्र रोग विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे थे। लेकिन अब दोनों का तबादला कर दिया है। ऐसे में जिला कुल्लू समेत चार जिलों के मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
आंखों के इलाज के लिए आने वाले लोगों को या तो मायूस होकर घर जाना पड़ रहा या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। खासकर उन मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें ऑपरेशन के लिए तारीख दी गई थी। अब उन्हें भी निजी अस्पताल में अपनी आंखों का ऑपरेशन करवाना पड़ रहा है। भोला राम, राम दयाल, कृष्ण चंद, रमेश चंद, सुनील कुमार, टेढ़ी सिंह, पवन कुमार तथा शिव चंद ने कहा कि कुल्लू अस्पताल में नेत्र बाह्य रोग ओपीडी बंद होने से मरीज परेशान हैं। उन्हें भारी भरकम पैसा देकर निजी अस्पतालों में इलाज करना पड़ रहा है। दिव्यांगों को भी मेडिकल बनाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। भाग सिंह, जय सिंह, टेक राम व बुद्धि सिंह ने कहा कि 300 बिस्तरों वाले क्षेत्रीय अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञों के खाली पदों के अलावा सर्जन का एक, हड्डी रोग विशेषज्ञ का एक, मनोचिकित्सक का एक और एक विशेषज्ञ आंख, नाक व गला रोग का पद खाली है।
अस्पताल में विशेषज्ञ के जो भी पद खाली चल रहे हैं, उनको भरने के लिए स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय के साथ पत्राचार किया गया है।
- डॉ. विक्रम कटोच, जिला स्वास्थ्य अधिकारी
नेत्र ओपीडी में पहुंचते हैं रोज 100 लोग
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की नेत्र बाह्य रोगी ओपीडी में रोजाना करीब 100 लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा हर माह लगभग 50 मरीजों की आंखों के ऑपरेशन भी किए जाते हैं। लेकिन अब ओपीडी बंद होने से न तो मरीजों का उपचार हो रहा और न ही ऑपरेशन।