रोहतांग टनल में सेरी नाला
बना बीआरओ के लिए चुनौती
अभी भी इस चुनौती से निपटने को बीआरओ को लगेंगे आठ माह
टनल में करीब 520 मीटर पर है सेरी नाले के पानी की लीकेज
सेरी नाले की वजह से तीन वर्ष ठप रहा है टनल का निर्माण कार्य
राकेश राणा
कुल्लू। सामरिक दृष्टि से अहम रोहतांग टनल में सेरी नाला बीआरओ के लिए चुनौती बन गया है। इसी वजह से रोहतांग टनल निर्माण कार्य में देरी हो रही है। अभी भी इस चुनौती से निपटने को बीआरओ को करीब आठ माह लगेंगे। सेरी नाले की वजह से पूर्व में भी रोहतांग टनल का निर्माण कार्य तीन साल तक ठप रहा है। वर्तमान में भी सेरी नाला बीआरओ के लिए बाधा बना हुआ है।
करीब 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल के दोनों छोर सितंबर 2017 में जुड़ गए हैं। अब टनल के अंदरूनी कार्य किए जा रहे हैं। इसमें मुख्य तौर पर सेरी नाले की लीकेज को रोकना भी शामिल हैं। टनल में 490 मीटर से आगे करीब 520 मीटर तक सेरी नाला की लीकेज है। जिसके कारण टनल के अंदर कुछ दायरे में पानी ही पानी है। पूर्व में 2012 से 2014 में इसी नाले की वजह से रोहतांग टनल का काम ठप रहा। नतीजतन रोहतांग टनल की लागत 1600 करोड़ से चार हजार करोड़ पहुंच गई।
बीआरओ ने उम्मीद जताई है कि करीब आठ माह के समय पर इस समस्या से पूरी तरह निपट लिया जाएगा। जून 2010 में रोहतांग टनल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। उस दौर में 2014 तक टनल निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था। फिर यह 2017 और वर्तमान में लक्ष्य दिसंबर 2019 तय किया गया है। 8.8 किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल में अत्याधुनिक सुविधाएं रहेंगी। टनल बनने से मनाली-लेह मार्ग की दूरी 50 किलोमीटर कम होगी। इसी के साथ लाहौल घाटी 12 महीने शेष विश्व से जुड़ी रहेगी। वर्तमान में करीब चार माह रोहतांग दर्रा में भारी बर्फ होने से लाहौल घाटी के लिए सड़क संपर्क पूरी तरह से कट जाता है। इधर, बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक ब्रिगेडियर मोहन लाल ने बताया कि आठ माह में रोहतांग टनल के भीतर सेरी नाला लीकेज पर काबू पा लिया जाएगा।
रोहतांग टनल पर रक्षा मंत्रालय की नजरें
रोहतांग टनल पर रक्षा मंत्रालय लगातार नजर रखे हुए है। मनाली-लेह मार्ग पर रोहतांग टनल का निर्माण कार्य सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी भी कुल्लू दौरे के दौरान रोहतांग टनल के उद्घाटन समारोह में आने की इच्छा जता चुके हैं। सितंबर 2017 में टनल के दोनों छोर जुड़ने पर रक्षा मंत्री सीता रमण भी जायजा ले चुकी हैं।
सेरी नाले से निपटने को बनाई रणनीति
रोहतांग टनल में सेरी नाले की चुनौती से निपटने के लिए बीआरओ ने रणनीति बना ली है। नाले के रूख को मोड़ने के बजाए वैकल्पिक उपाय किए गए हैं। टनल के डिजाइन के हिसाब से ही पानी ड्रेन की तरफ ले जाया जाएगा। वहीं इस संबंध में बीआरओ के चीफ इंजीनियर एनएम चंद्र राणा ने बताया कि सेरी नाला से निपटने के लिए काम जारी है।