कुल्लू/खराहल। आराध्य देवता बिजली महादेव के सम्मान में तीन दिवसीय काहिका उत्सव शुरू हो गया है। दशमी वारदा और ब्रिंडू देवता, भागासिद्ध और मांहुटी नाग ने मेले में पहुंचकर देव परंपरा को निभाया। दशमी वारदा के कारदार दोतराम ठाकुर ने बताया कि माता शनिवार को चंसारी के लिए रवाना होगी इसके बाद बंदल गांव भी जाएगी। आगे माता के आदेश के अनुसार ही मंदिर लौटने की शोभा यात्रा तय होगी।
उत्सव के दौरान रविवार को नड़ को जिंदा करने की परंपरा निभाई जाएगी। अचेत और जिंदा होने का यह दैवीय खेल बिजली महादेव के परिसर में आयोजित होगा। इसके लिए मंदिर कमेटी की ओर से तैयारियां कर ली हैं। देवता के आशीर्वाद से पहले नड़ मूर्छित हो जाएगा। कुछ देर बाद देवता के कारकून और गूर की ओर से देवता का मंत्रित पवित्र जल नड़ के शरीर पर छिड़का जाएगा। इसके साथ ही वह होश में आ जाएगा। इस अद्भुत उत्सव में सैकड़ों श्रद्धालु और हारियान भी साक्षी बनेंगे। बिजली महादेव मंदिर कमेटी के सचिव हेमराज शर्मा बताते है कि इस बार मंदिर में कुल्लवी नृत्य का आयोजन भी मेला कमेटी की ओर किया गया। इसमें पंद्रह नृतक पारंपरिक परिधान में कुल्ल्वी नृत्य शनिवार को मंदिर परिसर में देवलुओं संग किया गया। देवता के कारदार अमर नाथ नेगी ने बताया कि शनिवार को सभी देवता अपने देवालय लौट गए। काहिका उत्सव में बिजली महादेव ही प्रमुख भूमिका निभाते है।