मनाली (कुल्लू)। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी मनाली के सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। घाटी के लोग उपचार के लिए मनाली के निजी अस्पतालों पर निर्भर है। मनाली के सरकारी अस्पताल के लिए 50 बेड स्वीकृत हैं, परंतु मौके पर मात्र 30 ही बिस्तर लगे हैं।
गौरतलब है कि मनाली अस्पताल में स्थानीय लोगों के साथ लाहौल-स्पीति तथा पांगी से आने वाले लोग अपना उपचार के लिए आते हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें महंगा उपचार के लिए निजी अस्पताल की ओर जाना पड़ता है या फिर 40 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय कुल्लू या मंडी, शिमला व चंडीगढ़ जाना पड़ता है। मनाली नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष गौतम नाथ ठाकुर, अधिवक्ता शैलेंद्र शर्मा, हरबंस अवस्थी, चंदन शर्मा, कृष्ण ठाकुर तथा सीमा शर्मा ने कहा कि मनाली एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है तथा यहां के लोगों को 21वीं सदी में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल तो है लेकिन मरीजों की नब्ज टटोलने वाला विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। जिस कारण लोगों को मनाली से बाहर उपचार के लिए जाना पड़ता है।
सिविल अस्पताल मनाली के प्रभारी डॉ दोरजे ने बताया कि सिविल अस्पताल मनाली में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। अभी यहां 30 बिस्तरों को चलाया जा रहा है। अस्पताल भवन के लिए वन विभाग की मंजूरी नहीं मिली है।
मनाली एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। मुख्यमंत्री ने मनाली अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा दिया है। मनाली अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों भरना तथा मनाली के 15 मील में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत करवाना उनकी प्राथमिकता होगी। - हरि चंद शर्मा प्रत्याशी कांग्रेस मनाली विस क्षेत्र।
मनाली सिविल अस्पताल को एफआरयू यूनिट तथा 50 बेड की सुविधा दी है। मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रपोजल तैयार किया था, लेकिन 2012 में सरकार बदलने के कारण काम लटक गया और मनाली में लोगों को बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है।- गोविंद सिंह ठाकुर भाजपा प्रत्याशी मनाली विस क्षेत्र।