बहुत भयानक दृश्य था...। जो पहना है वही है... अब न बर्तन बचे हैं और न ही बिस्तर। आग की लपटें एक के बाद एक घर को अपने आगोश में ले रही थीं। हम अपना काम-काज छोड़कर घर की ओर भागे और सबसे पहले बच्चों व मवेशियों को दूर पहुंचाया। जब तक सामान निकालने के लिए लौटे, तब तक आग इतनी भयंकर हो चुकी थी कि कुछ भी निकालना नामुमकिन हो गया।