परागपुर में वर्षों की गंदगी ने छीनी मछलियों की जान
हल्की बरसात ने उजागर की सरकार की अनदेखी
संवाद न्यूज एजेंसी
परागपुर (कांगड़ा)। राष्ट्रीय धरोहर गांव परागपुर जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है। तहसील कार्यालय के ठीक सामने स्थित सरकारी तालाब में बुधवार रात से शुरू हुई मछलियों के मरने की घटना ने वीरवार सुबह भयानक रूप ले लिया। पानी की सतह पर सैकड़ों मरी हुईं मछलियां तैरती नजर आईं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मृत मछलियों के मुंह के पास खून के निशान थे। इससे यह आशंका गहरा गई है कि उनकी मौत किसी जहरीले पदार्थ के खाने के कारण हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में प्रदेश सरकार की संपत्ति दर्ज यह तालाब पिछले कई वर्षों से उपेक्षित है। इसकी नियमित सफाई नहीं हुई है।
तालाब की तलहटी में वर्षों से जमा गाद, सड़े हुए पत्ते और अन्य जैविक अपशिष्ट पानी को पहले ही अत्यधिक दूषित कर चुके थे। मंगलवार रात और बुधवार सुबह हुई हल्की वर्षा ही इस सामूहिक मृत्यु का कारण बनी। बारिश के कारण दूषित पानी में हलचल हुई, जिससे नीचे जमा सड़ी हुई गंदगी और कीचड़ ऊपर आ गया। आशंका जताई जा रही है कि तालाब के पानी में अचानक ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई और साथ ही गंदगी से बनी विषाक्त गैसों का स्तर बढ़ गया। इसकी वजह से सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई।
सूचना मिलते ही सहायक आयुक्त (राजस्व) एवं तहसीलदार चिराग शर्मा ने वीरवार को मौके का दौरा किया और पंचायत प्रतिनिधियों को तालाब की सफाई के निर्देश दिए। पंचायत उपप्रधान विजय धीमान ने जल्द सफाई का आश्वासन दिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल सफाई काफी नहीं है, बल्कि वर्षों तक तालाब की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।