धर्मशाला में टीबी मुक्त भारत अभियान की जानकारी देते जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद। -अ
धर्मशाला। जिला कांगड़ा को टीबी मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने युवाओं और शिक्षण संस्थानों को अपना सबसे बड़ा सारथी बनाया है। स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय में आयोजित एक कार्यशाला में 58 कॉलेजों, आईटीआई, नर्सिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्राचार्यों और रेड रिबन क्लब के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मुक्त भारत अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न रखकर एक जन-आंदोलन में बदलना है। कार्यशाला में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज से टीबी से जुड़ी गलत धारणाओं और डर को खत्म करने के लिए युवाओं की रचनात्मक सोच सबसे सशक्त माध्यम है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने कहा कि टीबी के प्रति डर और भेदभाव को केवल सही जानकारी और संवाद से ही मिटाया जा सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि कॉलेज के रेड रिबन क्लब अब परिसर और डिजिटल दुनिया (सोशल मीडिया) दोनों जगह सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि पोस्टर प्रतियोगिता, सोशल मीडिया रील्स और डिजिटल कहानियों के माध्यम से सफल उपचार की गाथाएं लोगों तक पहुंचाई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपचार शुरू होने के कुछ समय बाद मरीज से संक्रमण का खतरा नहीं रहता, इसलिए उनके साथ भेदभाव के बजाय सहानुभूति रखनी चाहिए।
इस अवसर पर जिले के तीन विश्वविद्यालयों, 25 कॉलेज, 3 विश्वविद्यालय, 22 आईटीआई, 5 नर्सिंग कॉलेज और 3 पॉलिटेक्निक कॉलेजों से आए 100 से अधिक प्रतिभागियों ने टीबी मुक्त समाज और स्वस्थ कांगड़ा के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। सभी ने संकल्प लिया कि वे इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाकर टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को सिद्ध करेंगे। साथ ही कई प्राचार्यों और नोडल अधिकारियों ने भी अभियान को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव रखे।
शिक्षण संस्थानों का तंबाकू मुक्त होना जरूरी : सीएमओ
सीएमओ कांगड़ा डॉ. विवेक करोल ने कहा कि स्वस्थ पीढ़ी तैयार करने के लिए शिक्षण संस्थानों का तंबाकू मुक्त होना और नियमित स्वास्थ्य गतिविधियां आयोजित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत अब पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे मशीनों से घर-द्वार पर शीघ्र जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।