रक्कड़ (कांगड़ा)। स्वस्थानी माता मंदिर रक्कड़ पंजपीरी में आयोजित व्रत कथा के दूसरे दिन पंडित सुमित शास्त्री ने कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवती सती जब अपने पिता दक्ष के घर यज्ञ में पहुंची, तब वहां भगवान शिव के लिए कोई भी स्थान न देखकर बड़ी दुखी हुई और योगाग्नि प्रकट कर उसमें भस्म हो गई।
भगवती माता के जहां भी अंग पतन हुए वहां एक शक्तिपीठ बना। शास्त्रों में वर्णन आता कि जो भी मनुष्य एक शक्तिपीठ का भी विधिवत पूजन कर ले तो उसका जीवन सफल हो जाता है। माता सती का अगला जन्म हिमालय की पत्नी मेनका के यहां पार्वती के रूप में हुआ। ऐसा वर्णन आता है कि पार्वती ने स्वस्थानी माता का दिव्य व्रत अनुष्ठान किया और पति रूप भगवान शिव को पाया।
कथा के बीच सुंदर भजन सजा दो घर को गुलशन सा मेरे सरकार आ जाओ... व मेरा दिल नईयों लगदा कृष्णा ने भक्तों को झूमने पर मजबूर किया। कथा में आचार्य रमेश, मीतू शर्मा, रणजीत, संजीव सोनू, श्यामा, इंदु, रजनी और सुषमा आदि ने भाग लिया ।