धर्मशाला। पौंग बांध से छोड़े पानी के कारण किसानों की खेतों में लहराती 600 एकड़ से अधिक भूमि पर बीजी गेहूं, गन्ने और सरसों की फसल तबाह हो गई है। इससे किसानों को करीब चार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। शुक्रवार रात पौंग बांध से छोड़े गए पानी के कारण व्यास दरिया में आई बाढ़ ने मंड क्षेत्र के दर्जनों गांवों में तबाही मचाई है।
शनिवार को बाढ़ग्रस्त प्रभावित लोगों से मिलने के लिए पहुंचे कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजय महाजन ने सरकार, प्रशासन और पौंग बांध प्रबंधन के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया। पानी से हुई तबाही में सबसे ज्यादा प्रभावित मंड बहादपुर, बड़ाला, हल्ले, राजगिरी भटोली, मलाल, भोग्रवां आदि गांव हुए हैं।
स्थानीय किसानों तिरलोक सिंह, पवन कुमार, करनैल सिंह, बलविंदर सिंह, रविंदर सिंह, विशंभर सिंह, ओंकार सिंह, विक्रम सिंह, रणजीत सिंह, तरसेम सिंह, रशपाल सिंह, चमन कुमार, कालू, अमन दीप सिंह, अमित कुमार, सुरिंदर सिंह, आदर्श कुमार, विपन कुमार, सुशील कुमार, प्रभजोत कौर, कमलजीत कोर, रणधीर सिंह, जसविंदर सिंह, संजीव कुमार आदि ने बताया कि पौंग बांध से शुक्रवार रात को छोड़े गए पानी के कारण उनकी खेतों में गन्ने की फसल, सरसों और गेहूं की फसल जिसकी मात्र पंद्रह दिन बाद कटाई होने वाली थी। पानी के कारण पूरी तरह से नष्ट हो गई है। पानी के कारण ट्यूबवेल में लगी मोटर भी जल गई। मवेशियों के लिए लगाया गया चारा भी तबाह हो गया। किसानों ने सरकार से मांग की है कि बांध से एक साथ छोड़े पानी के बजाय कम मात्रा में निरंतर पानी छोड़ा जाए। ताकि क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने ब्यास दरिया में करीब 200 मीटर लंबी टूटी धुस्सी को पक्का करने की मांग की है ताकि ब्यास का पानी इन बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में न पहुंच पाए।
नुकसान का मुआवजा दे सरकार
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दौरा करने पंहुचे जिला कांगड़ा कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजय महाजन ने बताया कि सरकार किसानों की फसलों के हुए नुकसान की तुरंत प्रभाव से भरपाई करे। इससे पहले भी कई मर्तबा किसानों की फसल पानी से तबाह हो गई, लेकिन सरकार ने कोई सबक न लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ब्यास दरिया का चैनेलाइज करे। किसानों को आगामी खेती के लिए सरकार मुफ्त बीज और काटनाशक दवाइयां सरकार मुहैया करवाए।
जल्द तैयार की जाएगी नुकसान की रिपोर्ट
बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में मौका पर पहुंचे एसडीएम इंदौरा सोमिल गौतम ने बताया कि जल्द ही किसानों के हुए नुकसान का प्रशासन आकलन करेगा और रिपोर्ट बना उपायुक्त कांगड़ा को प्रेषित की जाएगी। किसानों का करोड़ों का नुकसान हुआ है। वहीं, पौंग बांध से छोड़े जाने वाले पानी के लिए भी बांध प्रबंधन के साथ बैठक कर कोई रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि बाढ़ वाली स्थिति पैदा न हो सके।