धर्मशाला। पर्यटन नगरी धर्मशाला से दिल्ली के बीच चलने वाली अधिकतर निजी वोल्वो बसें सरकार के नियमों के विपरीत दौड़ाई जा रही हैं। इन निजी बस संचालकों के पास परमिट तो कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के हैं, लेकिन ये स्टेज कैरिज बसों की तर्ज पर सवारियों को जगह-जगह बस स्टॉप से उठा रही हैं। इससे न सिर्फ परिवहन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। हैरानी की बात यह है कि ये निजी वोल्वो बसें एचआरटीसी के मंडलीय कार्यालय के बिल्कुल नजदीक मुख्य सड़क पर खड़ी होती हैं। नियमों की अनदेखी पर शायद सत्ता के कुछ असरदार लोगों की छाया भी बनी हुई है, तभी तो इन बस संचालकों पर किसी प्रकार की ठोस रोक नहीं लग पाई है।
परिवहन विभाग के अनुसार अप्रैल से अब तक 31 निजी वोल्वो बसों के चालान किए जा चुके हैं, जिससे करीब 4.5 लाख रुपये का राजस्व सरकार के खाते में जमा हुआ है। बावजूद इसके इन बसों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। बीते दो माह में इनकी संख्या दोगुनी हो चुकी है। वर्तमान में धर्मशाला से दिल्ली रूट पर हर दिन करीब 25 निजी वोल्वो बसें दौड़ रही हैं। एचआरटीसी का बस किराया 1661 रुपये प्रति यात्री है जबकि निजी वोल्वो में यात्रियों से ये ऑपरेटर प्रति सीट 600 से 1500 रुपये तक का किराया वसूल रहे हैं। कम किराया होने से एचआरटीसी को नुकसान हो रहा है। इतना ही नहीं, धर्मशाला से चंडीगढ़ के बीच ये बसें स्टेज कैरिज की तरह जगह-जगह से सवारियां भी उठा रही हैं, जो पूरी तरह से अवैध है।
एचआरटीसी और टैक्सी चालकों को भारी नुकसान
गैरकानूनी बसों की बढ़ती संख्या से एचआरटीसी को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है। सरकारी बसों की सीटें खाली रह जाती हैं जबकि यात्रियों को निजी बस ऑपरेटरों के भरोसे सफर करना पड़ता है। साथ ही स्थानीय टैक्सी चालकों की कमाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई टैक्सी ऑपरेटर वाहन लोन की किस्तें भरने में भी असमर्थ हो गए हैं।
जिले में निजी वोल्वो बसें तो चल रही हैं लेकिन मैं इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता। यह मामला एचआरटीसी के बजाय आरटीओ से जुड़ा है। परिवहन विभाग के अधिकारी ही इसके बारे में कुछ कह सकते हैं।
-पंकज चड्ढा, डीएम, एचआरटीसी धर्मशाला
निजी वोल्वो बसों के कारण टैक्सी ऑपरेटरों को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। निजी वोल्वो बसें एचआरटीसी से भी कम किराये पर चल रही हैं। इसके बारे में एचआरटीसी के अधिकारी भी कुछ नहीं बोल रहे हैं, जो उन पर प्रश्न चिह्न खड़े करता है। यह बसें कांट्रेक्ट कैरिज परमिट की हैं लेकिन स्टैज कैरिज के तौर चल रही हैं। सरकार और संबंधित विभाग को इस मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
-अशोक शर्मा, प्रधान, दी भागसू टैक्सी आपरेटर यूनियन, मैक्लोडगंज
आगे भी होगी सख्त कार्रवाई : मुनीष सोनी
नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी ऑपरेटर को बख्शा नहीं जाएगा। इस साल अप्रैल से अब तक 31 बसों के चालान किए जा चुके हैं और भविष्य में भी यह अभियान जारी रहेगा।
-मुनीष सोनी, आरटीओ, कांगड़ा