ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी में धवाला की ज्वाला को शांत करने के लिए जिला भाजपा अध्यक्ष संजीव शर्मा ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी जगदीश डडवाल, मंडल भाजपा अध्यक्ष निर्मल सिंह और अन्य भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को पार्टी हाई कमान ने ज्वालामुखी भेजा।
लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में भाजपा नेता एवं विधायक ज्वालामुखी रमेश धवाला से लंबी बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में चर्चा हुई कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के पास मात्र डेढ़ साल शेष रहा है। ऐसे में पार्टी संगठन और सरकार के बीच में बेहतर तालमेल बनाने के साझा प्रयास किया जाए। जिला भाजपा अध्यक्ष अपनी पूरी उपमंडल देहरा की टीम के साथ रविवार को ज्वालामुखी में आए। उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश धवाला के साथ मिलकर विश्वास दिलाया कि निकट भविष्य में फिर कभी ऐसा नहीं होगा।
सरकार और संगठन मिलकर काम करेंगे। ज्वालामुखी मंडल भाजपा के अध्यक्ष मान चंद राणा सहित 12 लोगों को कार्यकारिणी में पदाधिकारी बनाने की सूची उन्होंने रमेश धवाला के साथ मिलकर बनाई। इसकी सूची पार्टी हाईकमान को स्वीकृति के लिए भेजी गई है। इसके अलावा बाकी कार्यकारिणी की सूची शीघ्र ही आपस में मिल बैठकर बनाने का भी निर्णय लिया गया। इससे पूर्व पार्टी कार्यकारिणी की जो सूची बनाई गई थी, उसे फिलहाल रोका गया है। जिन 12 लोगों का चयन किया गया है, उनमें मान चंद राणा अध्यक्ष, विजय मेहता, ज्योति शंकर बब्बू, सुधीर कुमार, राजेंद्र पाल, कमलेश कुमारी को उपाध्यक्ष बनाया गया। विमल कुमार और प्रवीण कुमार को महामंत्री और सुरेश कुमार, तरसेम लाल, सरोज कुमारी और देशराज हीर को सचिव बनाया गया है। इस मौके पर जिला भाजपा अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि अब जो बातें बीत गई हैं, उनको पीछे मुड़कर नहीं देखना है।
दखलंदाजी हुई, तो हमने भी जुबान पर ताला नहीं लगाया : धवाला
भाजपा नेता एवं विधायक ज्वालामुखी रमेश धवाला ने कहा कि यदि पार्टी संगठन अपना काम खुद करेगा और सरकार के काम में दखल नहीं देगा तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि दोबारा से उनके मामलों में दखलंदाजी की गई तो उन्होंने अपनी जुबान पर ताला नहीं लगाया है। वे सच्चाई को सबके सामने लाना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी को उन्होंने अपने खून से सींचा है। उन्होंने ही वर्ष 1998 में अपने वोट से कांग्रेस की सरकार को गिराकर भाजपा की सरकार बनाई थी, परंतु उनकी कुर्बानी को नजरअंदाज किया गया। इतना ही नहीं, उन्हें कमजोर करने के लिए संगठन के माध्यम से उन्हें तंग किया गया। मंडल में जो संगठन की नियुक्तियां हुईं उनकी मर्जी के बगैर हुईं। ऐसे लोगों को पार्टी में शामिल किया गया, जो पार्टी के सदस्य नहीं हैं। इससे निष्ठावान और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को दुख होता है। इससे पार्टी कमजोर होती है।