फतेहपुर (कांगड़ा)। विकास के नाम पर शुरू किया गया फतेहपुर-मैरा पल्ली सड़क का निर्माण अब क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी बन गया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से एफडीआर तकनीक से बनाई जा रही सड़क करीब एक वर्ष से अधूरी है। हजारों लोग धूल, गड्ढों और कीचड़ के बीच सफर कर रहे हैं।
विधानसभा क्षेत्र फतेहपुर और जवाली को जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग से रोजाना स्कूली बच्चे, मरीज, कर्मचारी, किसान और व्यापारी आवाजाही करते हैं। बारिश में यह मार्ग दलदल में बदल जाता है। धूप खिलने पर उड़ती धूल से दुकानदारों व राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है।
स्थानीय निवासी संतोष, संजीव, सलमान, नरेंद्र, अजय, विक्की, रिक्की, रमेश, पवन और जगदीश का कहना है कि इससे तो पुरानी सड़क ही बेहतर थी। ग्रामीणों ने सरकार और विभाग से कार्य जल्द पूरा करने की मांग की है।
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संबंधित ठेकेदार को निर्माण में तेजी लाकर सड़क का शेष कार्य और अंतिम डामरीकरण जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग कार्य की लगातार निगरानी कर रहा है। -विनय कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी मंडल, फतेहपुर
क्या है एफडीआर तकनीक
इस तकनीक के तहत गिट्टी युक्त पुरानी सड़क को उपकरणों से उधेड़कर उसे बारीक टुकड़ों में तब्दील कर दिया जाता है। उधेड़ी गई सड़क की पपड़ी को रीसाइकिल कर सड़क पर बिछाकर समतल किया जाता है। सीमेंट में चिपकने वाले केमिकल मिलाकर उसका घोल तैयार कर समतल किए गए हिस्से पर सतह के रूप में डाला जाता है। फिर इसे रीसाइक्लर और मोटरग्रेडर उपकरणों से रोल करने के बाद पैडफुट रोलर और काम्पैक्टर से दबाया जाता है। इसके बाद सात दिनों तक पानी से तराई की जाती है। फिर यातायात का दबाव झेलने के लिए सतह के रूप में स्ट्रेस एब्सार्बिंग इंटर लेयर तैयार की जाती है। इसके ऊपर पेवर मशीन से बिटुमिन कंक्रीट बिछाकर उस पर रोलर चलाया जाता है।
फतेहपुर–मैरा पल्ली मार्ग पर एफडीआर तकनीक का काम अधूरा, । जागरूक पाठक