धर्मशाला। प्रदेश के दूसरे बड़े मेडिकल कॉलेज टांडा में कुछ घंटे थायराइड टेस्ट बंद होना मरीजों की जेब पर भारी पड़ा। हालांकि यह समस्या शनिवार को पेश आई और सोमवार को रूटीन की तरह थायराइड टेस्ट हुए। टांडा अस्पताल में रोजाना 100 से अधिक मरीज थायराइड टेस्ट के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल में थायराइड मशीन की तकनीक अपग्रेड करने के लिए थायराइड टेस्ट बंद करते पड़े। स्त्री रोग ओपीडी में अपनी जांच करवाने आईं गीतिका, रीता, कोमल और सिमरन सहित अन्य मरीजों ने बताया कि जब वे थायराइड का टेस्ट करवाने क्रस्ना लैब पहुंची तो उनको वहां से यह बोल कर वापस भेज दिया गया कि अस्पताल से बाहर थायराइड टेस्ट करवा लें।
अस्पताल में निशुल्क टेस्ट करवाने की उम्मीद लेकर आई महिलाओं को निजी लैबों में करीब 400 रुपये खर्च करने पड़े। वहीं, कुछ महिलाएं वापस लौटे गईं। उधर, टांडा अस्पताल के एमएस डॉ. अशोक वर्मा ने बताया कि शनिवार को थायराइड मशीन में मानकीकरण के कारण कुछ घंटों के लिए क्रस्ना लैब में मरीजों को थायराइड टेस्ट की सुविधा से वंचित होना पड़ा। जैसे ही थायराइड मशीन में मानकीकरण किया गया वैसे ही मरीजों के लिए सुविधा सुचारू कर दी गई है।