बरियाल (कांगड़ा)। नगरोटा सूरियां को नगर पंचायत में बदलने की अधिसूचना रद्द होने की सूचना से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। नगरोटा सूरियां, बासा, कथोली और सुगनाड़ा पंचायतों को जोड़कर जब 20 दिसंबर 2024 को नगरोटा सूरियां को नगर पंचायत का दर्जा देने की अधिसूचना जारी की गई थी तो इन चारों पंचायतों में इसका विरोध शुरू हो गया था। स्थानीय नेताओं और निवासियों का मानना है कि यह कदम राजनीति से प्रेरित है और क्षेत्र के लिए हानिकारक है। उन्होंने नगर एवं ग्राम नियोजन (टीएंडसीपी) के नियमों और गृह कर के विरोध में प्रदर्शन किया था।
सरकार से इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग भी की थी। समय रहते चारों पंचायतों ने आपत्तियां भी दर्ज करवाई थीं, लेकिन जब सरकार ने उनकी आपत्तियों को नजरंदाज किया तो जनता ने सरकार और जवाली के विधायक एवं मंत्री चंद्र कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इसी बीच संजय महाजन के नेतृत्व में संघर्ष समिति का गठन कर प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। उच्च न्यायालय ने याचिका की सुनवाई के बाद नगर पंचायत की अधिसूचना को रद करने का 19 नवंबर को फैसला सुना दिया।
संघर्ष समिति के संयोजक और याचिकाकर्ता संजय महाजन ने कहा कि स्थानीय मंत्री ने सरकार को गुमराह कर राजनीतिक साजिश के तहत यह कदम उठाया था, जिससे नगरोटा सूरियां में विकास खंड मुख्यालय का औचित्य समाप्त कर इसे ज्वाली स्थानांतरित किया जा सके।
संघर्ष समिति के सह संयोजक एवं कथोली पंचायत प्रधान ने कहा कि कथोली पंचायत में 90 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। ऐसे में नगर पंचायत बनने के बाद कठोर नियमों और गृह कर से हजारों ग्रामीणों पर बोझ पड़ेगा और क्षेत्र की आर्थिक और प्रशासनिक मुश्किलें बढ़ेंगी।
पंचायत समिति उपाध्यक्ष धीरज अत्री ने नगर पंचायत नगरोटा सूरियां की अधिसूचना को रद्द करने के उच्च न्यायालय के फैसले को जनहित में बताया और कहा कि कथोली, बासा, सुगनाड़ा व नगरोटा सूरियां पंचायतों में ग्रामीण स्तर की ही सुविधाएं अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में इन पंचायतों का शहरीकरण करना तर्कसंगत नहीं है। सरकार को चाहिए कि पहले गरीबी रेखा में जी रहे परिवारों के उत्थान की योजना बनाई जाए उसके बाद ही इन पंचायतों का शहरीकरण किया जाए।