नूरपुर (कांगड़ा)। नूरपुर अस्पताल में लंबे अरसे से शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक का पद रिक्त होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को सिजेरियन डिलीवरी के लिए टांडा मेडिकल काॅलेज या पठानकोट के निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के लिए लगभग 40 से 50 हजार रुपये का खर्च आता है। यही नहीं, जिनका जन्म समय से पहले हो रहा है या फिर नवजात बीमार है तो उसे निओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में रखने की सूरत में लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। नूरपुर सिविल अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 34 स्वीकृत पदों में से 11 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें मेडिसिन स्पेशलिस्ट, महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, नेत्र और चर्मरोग विशेषज्ञ के अलावा शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त चल रहा है। नूरपुर समेत इंदौरा, जवाली, फतेहपुर और चंबा जिला के भटियात क्षेत्र से औसतन रोजाना 500 से 600 मरीज इलाज के लिए अस्पताल में आते हैं। बावजूद इसके मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव के चलते निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
तीन साल में मात्र 100 सिजेरियन डिलीवरी
नूरपुर सिविल अस्पताल में वर्ष 2022 में कुल 311 नार्मल डिलीवरी हुई। वर्ष 2023 में कुल 320 डिलीवरी में से 284 नार्मल और 36 सिजेरियन डिलीवरी दर्ज की गई। बीते वर्ष 2024 से फरवरी 2025 तक नूरपुर अस्पताल में कुल 341 डिलीवरी में से 277 नार्मल और 64 सिजेरियन डिलीवरी की गई हैं।
अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने का हरसंभव प्रयास किया जाता है। जहां तक स्टाफ के रिक्त पदों का सवाल है तो उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
- विवेक वन्याल, एमएस, नूरपुर अस्पताल