गगल (कांगड़ा)। कांगड़ा विधानसभा की ईच्छी पंचायत में 7-8 अप्रैल को होने वाला दो दिवसीय पारंपरिक एवं ऐतिहासिक मेला अपनी पहचान खोता जा रहा है। मेले की रौनक अब सिर्फ पांच-सात दुकानों तक ही सिमट कर रह गई है।
पहले मेले में काफी रौनक रहती थी, लेकिन अब न तो दुकानें हैं और न चहल-पहल। मेले में न तो झूले लगाए जाते हैं और न ही मौत का कुआं लगाया जाता है। करीब पांच साल पहले तक यहां का मेला ऐतिहासिक हुआ करता था। इसमें नामी-गिरामी पहलवान आते थे। खास कर झूले आकर्षण का केंद्र रहते थे।
लोग इस मेले में मिट्टी से बने मटके खरीदने आते थे। ईच्छी निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि दूर-दूर से लोग मेले से खरीदारी करते थे। सूरज, विकाश, अश्वनी, मदन, रोहित, राजेश कुमार मोंगरा, अंकु, अमित, नीरज, संदीप अरविंदर, राजीव ,केशव ,सुशील ने प्रशासन से मांग की है कि इस मेले को सभी के सहयोग से दोबारा से शुरू किया जाए। संवाद