तेलका (चंबा)। ग्राम पंचायत बाडका के सेरू और भेड़ोई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। अनुसूचित जाति बहुल इन गांवों की लगभग 1600 की आबादी को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। बरसात और सर्दियों में यह रास्ता और अधिक जोखिमभरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क की मांग उठाई जा रही है। कई बार सर्वे भी हुए हैं। बावजूद इसके निर्माण शुरू नहीं हो पाया। चुनाव के समय केवल आश्वासन मिलते हैं, लेकिन बाद में धरातल पर कुछ भी नहीं होता है। सड़क न होने से सबसे अधिक परेशानी बीमार और बुजुर्ग लोगों को होती है। आपात स्थिति में मरीजों को पालकी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। वहीं, छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज जाने के लिए रोजाना लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों तिलक राज, सुभाष कुमार, रवि, मदन, सुरेश कुमार, राकेश कुमार, रेमी, चमारू राम, रोहित कुमार, सुजल और राजिंद्र कुमार ने प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है।
हम कई वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं। चुनाव के समय हमें आश्वासन मिलते हैं, लेकिन उसके बाद कोई सुध लेने नहीं आता। पांच किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना हमारी मजबूरी बन गई है। -सुभाष कुमार, ग्रामीण
गांव की अधिकांश आबादी अनुसूचित जाति वर्ग से संबंध रखती है, लेकिन आज तक हमें सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल पाई। बीमार लोगों को पालकी के सहारे ले जाना पड़ता है, जो बेहद दुखद स्थिति है। -तिलक राज, ग्रामीण
छात्र-छात्राओं को रोज कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल और कॉलेज पहुंचना पड़ता है। बरसात के दिनों में रास्ता और खतरनाक हो जाता है। सरकार को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए। - राजिंद्र कुमार, ग्रामीण
कई बार सड़क का सर्वे हुआ, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ी। योजनाएं कागजों में बनती हैं, पर गांव तक उनका लाभ नहीं पहुंचता। जब तक सड़क नहीं बनेगी, तब तक हमारा विकास अधूरा रहेगा। -मदन कुमार, ग्रामीण
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कुमुद उपाध्याय ने बताया कि झौड़ा से सेरू तक प्रस्तावित सड़क के राजस्व संबंधी कागजात तैयार किए जा रहे हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।