कांगड़ा। राष्ट्रीय उच्च मार्ग-154 पर स्थित मटौर बैली ब्रिज की बार-बार प्लेटें निकलने से हादसों का खतरा बढ़ गया है। वाहन चालक भी डर के साये में पुल काे पार कर रहे हैं। पता नहीं कब ब्रिज की काेई प्लेट निकल जाए। इस पुल से गुजर रही हैवी लाेडेड गाड़ियां भी ब्रिज की प्लेटाें को नुकसान पहुंचा रही हैं। वाहन चालकाें और लाेगाें ने बैली ब्रिज की सही तरीके से देखरेख न हाेने के कारण विभाग और प्रशासन पर भी आराेप लगाए हैं।
बता दें कि मटाैर में बैली ब्रिज के साथ ही एक पुराना पुल है, जिसका निर्माण 100 वर्ष पहले हुआ था और माैजूदा समय में इसकी स्थिति इतनी ठीक नहीं है कि पुल से वाहनाें की दाेनाें तरफ की आवाजाही सह सके। इस पुल काे राहत देने के लिए एनएचएआई एक ओर यहां पास में पुल बैली ब्रिज निर्माण किया था, लेकिन इस ब्रिज की सही से देखरेख न हाेने के चलते इसकी हालत दिन-प्रतिदिन खराब हाेती जा रही है और इसकी प्लेटें निकली शुरू हाे गई हैं। इस पुल की लाेहे की प्लेटें निकलने एक बड़ा कारण हैवी लोडेड वाहन भी हैं। हालांकि पुल के साथ ही विभाग की ओर से एक सूचना बाेर्ड भी लगाया गया है कि इस पुल पर मल्टी-एक्सल वाहन जाे कि मारवल, सरिया व लकड़ी लेकर आते हैं, उनका यहां से प्रवेश वर्जित है। इस पुल की भार क्षमता 16 मीट्रिक टन है लेकिन ये वाहन भी यहां से गुजरते देखे गए हैं।
पुल के साथ स्पीड ब्रेकर बने रहे मुसीबत
मटाैर पुल के साथ बनाए गए ऊंचे स्पीड ब्रेकर भी परेशानी का कारण बन रहे हैं। यह स्पीड ब्रेकर जहां एक ओर ट्रैफिक की गति नियंत्रित करते हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ा रहे हैं, खासकर रात और बारिश में यहां पर दाेपहिया वाहनाें के स्किड हाेने के संभावना अधिक हाे जाती है।
एनएचएआई को पत्र लिखकर समस्या बताई गई है और अपील की है कि इस पुल की सही तरीके से मरम्मत की जाए या फिर यहां पर दूसरा पुल बनाया जाए। -इशांत जसवाल, एसडीएम कांगड़ा।