छोटे खाद्य निर्माता की श्रेणी में आता था या नहीं, विभाग यह भी साबित नहीं कर पाया
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी धर्मशाला डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने बिना खाद्य लाइसेंस मिठाई की दुकान चलाने के मामले में आरोपी कारोबारी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी ऐसा खाद्य कारोबारी था, जिसके लिए खाद्य लाइसेंस लेना अनिवार्य था। इसके अलावा अभियोजन यह भी साबित नहीं कर सका कि आरोपी छोटे खाद्य निर्माता की श्रेणी में नहीं आता था।
जुलाई 2018 को तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने धर्मशाला क्षेत्र में स्थित एक मिठाई की दुकान का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान दुकान में मिठाइयां, नमकीन और अन्य खाद्य सामग्री बिक्री के लिए रखी मिली। अधिकारी के अनुसार आरोपी खाद्य लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। कर्मचारियों के एप्रन, टोपी, दस्ताने और जूते नहीं पहनने सहित स्वच्छता संबंधी कमियां भी पाई गई थीं।
अदालत ने माना कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 31(2) के तहत छोटे खाद्य निर्माताओं को लाइसेंस लेने से छूट है और उन्हें केवल पंजीकरण कराना होता है। संबंधित नियमों के अनुसार छोटे खाद्य निर्माता की श्रेणी तय करने में सालाना कारोबार और उत्पादन क्षमता महत्वपूर्ण है। लेकिन अभियोजन ने आरोपी के कारोबार का सालाना टर्नओवर, उत्पादन क्षमता या कर्मचारियों की संख्या से संबंधित कोई साक्ष्य पेश नहीं किया।
अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन की ओर से पेश किया गया वह अधिसूचना पत्र, जिसके आधार पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अभियोजन की मंजूरी देने का अधिकार बताया गया था, केवल छायाप्रति थी। इसे विधि के अनुसार प्रमाणित नहीं किया गया था। सभी तथ्यों को जांचने के बाद अदालत ने कारोबारी को मामले से बरी किया है।