परौर में सत्संग खत्म होने के पश्चात अपने घरों को वापिस लौटती संगत। संवाद
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सुलह (कांगड़ा)। राधा स्वामी डेरा ब्यास के नए उत्तराधिकारी हुजूर जसदीप सिंह गिल ने बाबा गुरिंद्र सिंह ढिल्लों की मौजूदगी में रविवार को सत्संग से संगत को निहाल किया। परौर में इस दो दिन के समागम में करीब चार लाख लोग पहुंचे और सत्संग सुना।हुजूर जसदीप सिंह गिल ने लगभग एक घंटा पांच मिनट तक सत्संग किया। इस दौरान हुजूर ने कहा कि बाणी धाम अपने चलो भाई, पराए देश क्यूं रहना। संत महात्मा हमारे दरम्यान आते हैं और हमें अपने जीवन का सार समझाते हैं कि हमारा असल घर कौन सा है। हुजूर ने संगत से कहा कि जैसे हम अब कहीं सफर करने जाते हैं तो कोई हमसे पूछता है कि कहां जा रहे हो, तो हम खुशी के साथ कहते हैं कि हम अपने घर जा रहे हैं। अपना घर कौन सा है, क्या वह जहां हमने जन्म लिया है। हुजूर जसदीप गिल ने बताया कि अपना असल घर सिर्फ वही है, जहां हमने जन्म लिया है और वह है सचखंड। हुजूर ने उदाहरण से समझाया कि आए जाए सो माया क्या है। उन्होंने कहा कि यह शरीर तो एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा। जैसे किसी कार में से इंजन निकाल लें तो वह खाली डिब्बा बन के रह जाती है, वैसे ही हमारे शरीर से आत्मा निकल जाए तो यह शरीर सिर्फ एक पुतला रह जाता है। हमारा शरीर असलियत नहीं है, यह तो एक दिन मिट्टी हो जाना है।
हुजूर ने कहा कि आज हम सारे भ्रम में जी रहे हैं, मान लो अगर हम हरे रंग का चश्मा लगाकर देखेंगे तो हमें सिर्फ हरा ही दिखाई देगा लेकिन असलियत तब पता चलती है जब हम चश्मा उतारकर देखते हैं। जैसे बच्चे स्कूल जाते हैं तो उनका मकसद स्कूल से सीख लेने का होता है, लेकिन आखिरकार उन्हें अपने ही घर लौटना होता है। वैसे ही हम सब इस संसार में थोड़े समय के लिए कुछ सीखने आए हैं हमारा असली घर तो सचखंड में है। हमें वापस लौट कर जाना है।
इंसान ने अपने स्वार्थ के लिए खुद को देश और धर्मों में बांट लिया
हुजूर जसदीप सिंह गिल ने सत्संग में संगत से कहा कि इंसान ने अपने स्वार्थ के लिए खुद को देश और धर्मों में बांट लिया, लेकिन यह सच्चाई नहीं है। आज इंसान झूठ के सहारे पर जी रहा है, इंसान यहां आने के बाद ऐसा मानकर बैठ गया है, जैसे यहां से वापस कभी जाएगा ही नहीं। मालिक ने तो हमें यहां कुछ सालों के लिए सीखने को भेजा था, जिससे कि हम सीखकर वापस अपने असल धाम पहुंच सकें, लेकिन इंसान यहां आकर यहीं का हो जाना चाहता है और मोहमाया ने इंसान को बांध दिया है।
सत्संग में आकर बैठ जाना काफी नहीं है
हुजूर जसदीप सिंह गिल बताते हैं कि हम सत्संग में तो आते हैं परंतु सत्संग की बातों पर अमल नहीं करते। यहां आकर बैठ जाना काफी नहीं है, यहां से सीख कर जाएंगे तो ही आगे बढ़ पाएंगे।
भजन सिमरन की एहमियत बताई
हुजूर ने कहा कि हमें दिन में कम से कम ढाई घंटे सिमरन और भजन को देना चाहिए। हम दिन के तमाम काम कर लेते हैं, लेकिन जब भजन सिमरन की बारी आती है तो हम लापरवाही करने लगते हैं और गैर जिम्मेदार हो जाते हैं। हम कह देते हैं कि दिन भर के काम से मैं थक गया हूं। इसलिए भजन सिमरन करूंगा।