पालमपुर (कांगड़ा)। केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) धर्मशाला के मुख्य कैंपस के निर्माण को लेकर अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। हाईकोर्ट द्वारा प्रदेश सरकार को 30 करोड़ रुपये जमा करवाने के निर्देश देने पर पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले ने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब अगली पेशी से पहले सरकार को ये राशि जमा करवा देनी चाहिए।
शांता कुमार ने कहा कि एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत ही आज 14 साल बीत जाने के बाद भी धर्मशाला कैंपस का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वे सांसद थे, तब देहरा और धर्मशाला के बीच विवि को लेकर विवाद हुआ था, जिसे सुलझाते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि मुख्य कैंपस धर्मशाला में रहेगा और दूसरा कैंपस देहरा में बनेगा।
शांता ने आरोप लगाया कि केंद्र के निर्णय के बावजूद पूरा विश्वविद्यालय देहरा ले जाने का राजनीतिक षड्यंत्र चलता रहा। उन्होंने कहा कि देहरा कैंपस के लिए तो सरकार ने तुरंत धन दे दिया और उसका निर्माण भी पूरा हो रहा है, लेकिन धर्मशाला के साथ घोर अन्याय किया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अतुल भारद्वाज द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल किए गए दावे की सराहना की। उन्होंने कहा कि अतुल के तर्कों को पढ़ने के बाद ही हाईकोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया कि हिमाचल सरकार को कैंपस निर्माण के लिए 30 करोड़ रुपये देने चाहिए। शांता ने कहा कि इस विषय पर उनकी मुख्यमंत्री से भी बात हुई थी, जिन्होंने आर्थिक स्थिति ठीक होने पर राशि देने का आश्वासन दिया था। अब उन्होंने मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह किया है कि वे देरी न करें और अगली पेशी से पहले यह राशि जमा करा दें।