इसके साथ ही भूकंप सुरक्षा से संबंधित भवनों की समीक्षा कर किसी भी संरचनात्मक कमी को रिपोर्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्रतिक्रिया एवं तैयारी प्रणाली को मजबूत करना है। समस्त संस्थान आपातकालीन संचार प्रोटोकॉल अपडेट करने के साथ ही आपदा की स्थिति में निकासी योजनाओं का भी अभ्यास करें, इसके साथ ही प्राथमिक उपचार, अग्नि सुरक्षा और बचाव उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और संस्थान में सुरक्षित एकत्रीकरण स्थलों की पहचान कर प्रमुख कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि संस्थान में जागरुकता गतिविधियां चलाएं ताकि प्रत्येक सदस्य को यह जानकारी हो कि भूकंप से पहले, दौरान और बाद में सुरक्षित तरीके से कैसे कार्य करना है। उन्होंने कहा कि यह सभी कार्य अनिवार्य रूप से पूरे किए जाएं और एक सप्ताह के भीतर पूर्ण कर रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी जाए।